पहाड़ का सीना चीरकर निकला बिहार का लाल, 'काल के सुरंग' में वो 41 दिन

पहाड़ का सीना चीरकर निकला बिहार का लाल, 'काल के सुरंग' में वो 41 दिन
छपरा: पिछले 17 दिनों से उत्तरकाशी में सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया। इन्हीं मजदूरों में सारण जिले के रसूलपुर थाना क्षेत्र की देवपुरा पंचायत के खजुहान गांव का सोनू साह भी शामिल था। मंगलवार की देर शाम सोनू अपने 41 मजदूर साथियों के साथ बाहर निकाला गया। जब वो बाहर निकला तो 16 दिन से बाहर इंतजार करते देख अपने भाई को देख उसके आंसू निकल पड़े। उधर जैसे ही ये खबर उसके घर सारण पहुंची, परिवार ने 41 दिन के बाद चैन की सांस ली। सोनू की आंगनबाड़ी सेविका मां शिवमुखी देवी ने पूछे जाने पर कहा कि वो जब तक बेटे को अपनी आंखों के सामने नहीं देख लेंगी, उन्हें चैन नहीं आएगा।

16 दिन से भाई सुरंग के बाहर बैठा था भाई

दीपावली के दिन घटना की खबर मिलते ही सोना का भाई सुधांशु साह गुड़गांव से निकल गया था। इसके बाद पेशे से क्वालिटी इंजीनियर सोनू का छोटा भाई सुधांशु साह पल-पल की खबर देकर परिवार को हिम्मत दे रहा था। सुरंग के बाहर भाई के बाहर निकलने का इंतजार कर रहे सुधांशु ने बताया कि उतराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके एक कैबिनेट मंत्री बीके सिंह ने पीड़ितों की हर मदद करने की बात कही थी।

छठ में घर आने की तैयारी कर रखी थी सोनू ने

उत्तरकाशी टनल के बाहर ही मौजूद सुधांशु ने बताया कि उसका बड़ा भाई नवयुग कंस्ट्रक्शन कंपनी में पिछले करीब दस वर्षों से इलेक्ट्रिशियन है। उत्तरकाशी में बन रही साढ़े चार किमी लम्बी सुरंग निर्माण में वो चार साल से कार्यरत है। घटना के दिन नाइट ड्यूटी कर वो सुबह पांच बजे अपने साथियों के साथ कमरे पर लौट रहा था कि सुरंग धंसने की खबर आई। सुधांशु के अनुसार दूसरे तीसरे दिन से ही सरकार, प्रशासन और कंपनी ने वायरलेस कनेक्शन कर पीड़ितों से बात करानी शुरू की। सुधांंशु ने बताया कि 'सोनू भैया और मेरी छठ में घर जाने की तैयारी थी। लेकिन आज छठी मइया की कृपा से ही मेरा भाई सुरक्षित है।'

गांव पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने पूछा तक नहीं

उधर सोनू के घरवालों का कहना है कि वो ठीक से खाना तक नहीं खा पा रहे थे। ये सच बात है कि उनकी मनोदशा का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। वहीं परिजनों ने कहा कि इस हादसे के बाद से पूरे मोहल्ले के लोग सदमे में थे। सब उन्हें ढाढस बंधा रहे थे। लेकिन प्रशासन या किसी जनप्रतिनिधि ने उनके परिवार की सुध तक नहीं ली। सोनू के पिता सवलिया साह और माता शिवमुखी देवी ने कहा कि 'सोनू की पत्नी, उसकी सात वर्षीय बेटी और सारे परिवार को लेकर 17 दिन कैसे कटे, ये हमारे अलावा और कोई नहीं समझ सकता। लेकिन दुख की बात ये है कि न तो हमारी सुध स्थानीय प्रशासन ने ली और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने।'
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