बिहार के चुनाव नतीजे और सलाह देते मोहन यादव

बिहार के चुनाव नतीजे और सलाह देते मोहन यादव
नवम्बर माह में होने जा रहे बिहार विधानसभा के नतीजे चाहे वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए के पक्ष में हों या इंडिया गठबंधन के, लेकिन देश की आगे की राजनीति पर वह व्यापक असर डालने वाले होंगे। नतीजों से यह पता चलेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अधिक शक्तिषाली बनकर उभरते हैं या फिर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तेजस्वी की जोड़ी को ताकत मिलती है। देखने वाली बात यही होगी कि चुनाव नतीजों के बाद नीतीश कुमार अभी जहां हैं वहीं रहते हैं या कोई नई कलाबाजी दिखायेंगे। जहां तक मध्यप्रदेश का सवाल है मुख्यमंत्री मोहन यादव इस समय यादवों के बीच भाजपा के प्रमुख प्रचारक भी बने हुए हैं और उन्हें भी बिहार चुनाव में प्रमुख भूमिका अदा करना है। डाॅ. नरोत्तम मिश्रा जो  जोड़ -तोड़ की राजनीति में सिद्धहस्त माने जाते हैं उन्हें भी मध्यप्रदेश के अन्य कुश ल संगठनकर्ताओं के साथ बिहार में डेरा डालने को कहा गया है। तो वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव भारतीय प्रशासनिक सेवा के आला अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों का सम्मान करने की सलाह देते नजर आ रहे हैं।

      मुख्यमंत्री डाॅ. यादव ने दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में अधिकारियों को सलाह दी कि वे विनम्र रहें और जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें। यह कहावत है कि ‘‘प्यादे से फर्जी भयो, टेढ़ो-टेढो जाय‘‘। शायद  यही कारण है कि मुख्यमंत्री को दो दिवसीय कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस को अधिकारियों को सलाह देने की नौबत आई। इस बीच कुछ जनप्रतिनिधियों और कुछ कलेक्टरों व अन्य अधिकारियों के बीच तनातनी की खबरें सामने आई हैं। विधायकों को भी सलाह दी गयी कि जनता का विश्वास हमारी पूंजी है इसे बनाये रखने का दायित्व हम सबका है। कलेक्टर-कमिश्नर सहित अन्य अधिकारियों की भूमिका एक सेतु की है, संवाद हर चुनौती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिए अधिकारी जनप्रतिनिधियों और आमजन से संवाद करते रहें तथा एक विद्यार्थी की तरह विनम्र रहें। किसी भी ज्वलंत विषय पर पूरी दक्षता व तथ्यों के साथ अपनी बात अवश्य  रखें लेकिन जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें , मिशन मोड में एकजुट होकर काम करें, तभी हम निर्धारित लक्ष्यों को हासिल कर पायेंगे। 
       मुख्यमंत्री ने यह सलाह कांफ्रेंस का शुभारंभ करते हुए दी। पहले दिन नौ घंटे कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, नगरीय विकास सहित अन्य विषयों पर भी मंथन हुआ। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में निश्चित तौर पर रोजगार के द्वार खुलेंगे और शहरी क्षेत्रों में लीड बैंक बनेंगे। इस प्रकार से उन्होंने यह भी रेखांकित कर दिया कि आखिर मध्यप्रदेश को और अधिक विकसित बनाने के साथ ही साथ बेरोजगार युवकों को रोजगार कैसे उपलब्ध हो इसका भी खाका  बना रखा है।
मध्यप्रदेश एक प्रकार से कृषि प्रधान प्रदेश है इसलिए मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि दुग्ध उत्पादन और सिंचाई का रकबा बढ़ाने की दिशा में प्रयास और नवाचार किए जायें। यदि हमें वांछित लक्ष्य को पाना है तो नवाचार करना ही होगा। जिलों में तैनात अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि छात्रावास, स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन दुकान, निर्माण कार्यों, अस्पतालों आदि का औचक निरीक्षण किया जाये और किसी गांव में रात्रि विश्राम भी करें। यदि अधिकारीगण गांवों में विश्राम करेंगे, ग्रामीणों से चर्चा करेंगे तो उन्हें मैदानी वास्तविकताओं और इस बात का भी एहसास होगा कि ग्रामीण आकांक्षायें सरकार से क्या हैं, यह मालूम होने के बाद योजनायें बनेगी तो इसका और भी अधिक फायदा मिलेगा। मैदानी अधिकारी जनप्रतिनिधियों एवं जनता से संवाद आवश्यक रुप से बनाये रखें। अक्सर यह देखने में आया है कि दोनों के बीच संवादहीनता की स्थिति रहती है। जनप्रतिनिधि को हर पांच साल में जनता के बीच कड़ी परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है और वह मैदानी जरुरतों को समझता है इसलिए यदि उसकी सलाह पर ही योजनायें बनेगी तो रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा विकास को गति भी मिलेगी। आमजन से मिलने की व्यवस्था और जन सुनवाई को और अधिक बेहतर बनाया जाये। यदि ऐसा होता है तो लोग बेहिचक होकर अपनी बात अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। सांस्कृतिक और धार्मिक विरासतों के उद्धार और सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिये। यदि सांस्कृतिक और धार्मिक सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिया गया तो निश्चित तौर पर मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा जिससे एक ओर तो आय में वृद्धि होगी और दूसरे उस धार्मिक पर्यटन और सनातन की अवधारणा को भी बढ़ावा मिलेगा, जिसे सरकार अपनी नीतियों का आधार बना रही है। राम वन पथ गमन के बाद कृष्ण पथ का निर्माण सिंहस्थ से पहले पूरा होने पर जोर दिया गया ताकि सिंहस्थ में लोगों को इसका फायदा मिल सके।
और यह भी
आला अधिकारियों को सलाह देने के बाद अब मंत्री और विधायकों के कामकाज की समीक्षा मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव करने वाले हैं। जिसमें इस बात पर जोर रहेगा कि किस मंत्री ने गांव में रात्रि विश्राम किया और चैपाल लगाई। प्रभार के जिलों में प्रतिमाह दौरा कर रहे हैं या नहीं और मंत्रियों का अधिकारियों से कैसा तालमेल हैं। इसके साथ ही पार्टी संगठन के कामकाज में सहभागिता कैसी है यह भी देखा जायेगा, साथ ही केंद्र से मिले अभियानों को सफल बनाने में कितने मंत्रियों का  प्रदर्शन अच्छा रहा और कितने मंत्रियों और विधायकों से आमजनता और पार्टी कार्यकर्ता संतुष्ट हैं या नहीं इस पर भी गौर किया जायेगा। देखने वाली बात ही होगी कि आखिर इन बातों पर कितना अमल होता है।

-अरुण पटेल
-लेखक , प्रबंध   
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