जज गोय रेजिमबाल्ड ने आवेदक कंवलजीत कौर के इस दावे से असहमति जताई कि सिख्स फॉर जस्टिस से जुड़े होने के चलते उनके उत्पीड़न का खतरा है। जज ने कहा, 'तथाकथित खालिस्तान जनमत संग्रह के लिए मतदान कार्ड होना यह स्थापित करने के लिए नाकाफी है कि कौर की भारतीय अधिकारियों के बीच कोई उच्च 'प्रोफाइल' है।
साल 2018 में गई थीं कनाडा
पंजाब की रहने वाली कौर फरवरी 2018 में कनाडा पहुंची थीं। एक साल से भी अधिक समय बाद सितंबर 2019 में कौर ने शरणार्थी संरक्षण का दावा किया। 32 वर्षीय कंवलदीप कौर ने सुनवाई से अपने मूल आवेदन में संशोधन करते हुए कहा कि वे कनाडा में खालिस्तान समर्थक बन गए हैं। अगर उन्हें भारत वापस भेजा गया तो उनकी नई राजनीतिक गतिविधियों के चलते उन्हें सताया जाएगाइस पर फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि खालिस्तान आंदोलन में कथित रुचि और भागीदारी का घटनाक्रम वास्तविकता की कमी को दर्शाता है। कोर्ट ने इस दावे को कपटपूर्ण और सद्भावना की कमी वाला बताया। संघीय न्यायालय ने माना कि कौर के दावों में दम नहीं है, उनके बारे में ऐसा नहीं लगता कि वह अपनी गतिविधियों से भारतीय अधिकारियों की नजर में हैं।











