बाइडन ने रूस पर एक तीर से किया दोहरा शिकार, अमेरिका की बल्‍ले-बल्‍ले, दोस्‍त भारत भी हुआ मजबूर

बाइडन ने रूस पर एक तीर से किया दोहरा शिकार, अमेरिका की बल्‍ले-बल्‍ले, दोस्‍त भारत भी हुआ मजबूर
वॉशिंगटन: यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की घेरेबंदी करने में जुटे अमेरिका ने तेल व्‍यापार पर नए प्रतिबंधों का ऐलान करके व्‍लादिमीर पुतिन सरकार की मुश्किल बढ़ा दी है। अब तक रूस से रेकॉर्ड पैमाने पर तेल खरीदने वाले भारत पर भी प्रतिबंधों की मार पड़ी है और अब वह अमेरिका से जमकर तेल खरीदने में जुट गया है। अगले महीने 2,50,000 बैरल कच्‍चा तेल अमेरिका से भारत पहुंचने जा रहा है। यह पिछले एक साल में अमेरिका से सबसे ज्‍यादा तेल की खरीद है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल का आयातकर्ता और उपभोक्‍ता है। माना जा रहा है कि सख्‍त अमेरिकी प्रतिबंधों की मार को देखते हुए अब भारत अपने तेल आयात में विव‍िधता ला रहा है। इससे जहां रूस के तेल निर्यात पर असर पड़ सकता है, वहीं अमेरिका का बंपर मुनाफा हो सकता है।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत समुद्र के रास्‍ते भेजे जाने वाले तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। पिछले साल यूक्रेन युद्ध के बीच भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार था। वह भी तब जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण अन्‍य देशों ने रूस से किनारा कर लिया था। पिछले महीने अमेरिका ने रूस को सबक स‍िखाने के लिए अपने प्रतिबंधों को और ज्‍यादा सख्‍त कर दिया। अमेरिका ने रूस की शिपिंग फर्म सोवकोमफ्लोट और 14 अन्‍य क्रूड ऑयल टैंकरों पर भी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा दिया। भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी चलाने वाली कंपनी रिलायंस ने सोवकोमफ्लोट के तेल से किनारा कर लिया है।
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