भूटान की राजधानी थिम्फू में पोयट्री क्लब भूटान एवम् क्रांति धरा साहित्य अकादमी मेरठ के संयुक्त संयोजन में डा. विजय पंडित के मार्गदर्शन में गरिमामय आयोजन "भूटान भारत साहित्य महोत्सव" सफलता के साथ सम्पन्न हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य वसुदैव कुटुम्बकम की भावना के साथ शिक्षा,साहित्य,संस्कृति, कला के माध्यम से एक दूसरे से जुड़ना,परस्पर सहयोग की भावना एवं साहित्यिक दायरे का विस्तार करना। राजेंद्र मोहन शर्मा(जयपुर)की अध्यक्षता एवम् मुख्य अतिथि सुश्री श्वेता सिंह उमा (मास्को),विशिष्ट अतिथि डा. देवेंद्र अरोरा (भूटान) ,विशिष्ट अतिथि, श्रीमती विमला भंडारी ( सालूम्बर -राजस्थान) सारस्वत अतिथि सीता माया राई संस्थापक पोयट्री क्लब भूटान,जसप्रीत कौर(लुधियाना)एवं राजेन्द्र पुरोहित, हेमन्त सक्सेना की गरिमामय उपस्थिति में भारत के विभिन्न राज्यों के लगभग 72 साहित्यकारों एवं भूटान के लगभग 15 रचनाकारों ने विभिन्न विधा,विषयों पर सारगर्भित रचनाएं प्रस्तुत कर आयोजन को यादगार बना दिया। बी एच ई एल,जन सम्पर्क विभाग से सेवा निवृत्त अधिकारी तथा चर्चित कवि सुरेश सोनपुरे एवं डॉ गोपेश बाजपेई,अशोक व्यास, डॉ अनिल शर्मा "मयंक" का अतिथियों ने स्मृति चिन्ह,अंग वस्त्र,एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मान किया। सुरेश सोनपुरे"अजनबी" ने भारत की आन, बान,शान तिरंगा पर अपनी रचना "चांद सूर्य सा सदा चमकता मेरा हिन्दुस्तान रहे, लहर लहर लहराए तिरंगा विश्व में गौरव गान रहे" प्रस्तुत कर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। डॉ गोपेश बाजपेई ने अपनी रचना "मां का कहना मानकर मां का लो आशीष, मां ही सच्ची मीत है मां ही है जगदीश" डॉ अनिल शर्मा "मयंक" ने रचना "लाखों ने बलिदान दिया था, उनका वो सम्मान कहां है बोलो नेहरू,बोलो गांधी मेरा हिन्दुस्तान कहां है" अशोक व्यास ने मोबाइल संस्कृति पर अपनी रचना "मै और मेरा मोबाइल अक्सर बाते करते है।
सुनाकर साहित्यकारों को मंत्र मुग्ध कर दिया। विशेष प्रस्तुतियों के अंतर्गत डॉ खेमचंद्र यदुवंशी ने नौटंकी के इतिहास ,शैली को विस्तार पूर्वक बताया।संग्राम सिंह द्वारा आल्हा प्रदर्शन,अनुराधा दुबे(रायपुर)द्वारा कत्थक नृत्यकला प्रदर्शन,आनंद श्रीवास्तव प्रयागराज एवं ऊषा शा कोलकाता द्वारा राम शबरी प्रसंग प्रस्तुति को अत्यंत सराहा गया। तीन साहित्यिक शोध पत्र प्रस्तुत किए एवं अतिथियों ने 10 किताबों का विमोचन भी किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ विजय पंडित ने किया तथा सीमा " वर्णिका" कानपुर ने औपचारिक आभार व्यक्त किया।











