बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, फरीदा का कहना है कि हिल्सा बांग्लादेश की राष्ट्रीय मछली है लेकिन यह इतनी महंगी है कि गरीब लोग इसे नहीं खरीद सकते। इसकी वजह इसका दूसरे देशों में जाना है। पिछली सरकार दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान मछली से बैन हटा देती थी। इस बार सरकार ऐसा नहीं करेगी। फरीदा अख्तर का यह रुख पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत के साथ 'हिल्सा डिप्लोमेसी' से पूरी तरह से अलग है। हसीना सरकार 'हिल्सा डिप्लोमेसी' के तहत त्योहारी सीजन के दौरान मछली की खेप को भारत ले जाने की अनुमति देती रही थी। शेख हसीना ने कई मौकों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हिल्सा उपहार के तौर पर भेजीं। 2017 में तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी हसीना ने 30 किलोग्राम हिल्सा उपहार में दी थी। कह सकते हैं कि हिल्सा को शेख हसीना भारत और खासतौर से पश्चिम बंगाल के नेताओं के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए इस्तेमाल करती रही थीं।
हसीना के बाद बदली बांग्लादेश की नीति!
बंगाली समाज में (भारत और बांग्लादेश दोनों) हिल्सा मछली की बहुत अहमियत है, इसे पवित्र माना जाता है। ऐसे में दुर्गा पूजा के दौरान इसकी कमी कई लोगों को निराश करेगी। इस मछली को बंगाल में कई तरीकों से पकाया जाता है। इसे सरसों के पेस्ट के साथ भाप में पकाया जाना भी मशहूर है। दरअसल बांग्लादेश हिल्सा (तेनुलोसा इलिशा) का प्रमुख उत्पादक है, जो हेरिंग से संबंधित मछली की एक प्रकार की प्रजाति है। ये बंगाल की खाड़ी में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है और नदियों में भी पनपती है।











