पाकिस्तान-तुर्की वाले मक्का रक्षा समझौते में बांग्लादेश की एंट्री से बढ़ेगी भारत की टेंशन, चिकेन नेक पर समझें खतरा

पाकिस्तान-तुर्की वाले मक्का रक्षा समझौते में बांग्लादेश की एंट्री से बढ़ेगी भारत की टेंशन, चिकेन नेक पर समझें खतरा
ढाका: सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की वाले मक्का रक्षा समझौते में बांग्लादेश के शामिल होने की इच्छा ने भारत के सुरक्षा और खुफिया हलके में बेचैनी बढ़ा दी है। भारत के सीनियर इंटेलिजेंस सूत्रों का कहना है कि मक्का समझौते में बांग्लादेश के शामिल होने से नई दिल्ली के लिए रणनीतिक खतरा पैदा हो सकता है। इस्लामिक NATO कहे जा रहे इस रक्षा समझौते में अगर बांग्लादेश जुड़ता है, तो भारत को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास एक ऐसे इंटेलिजेंस और डिफेंस नेटवर्क का सामना करना पड़ सकता है, जो उसके अनुकूल नहीं है।

मक्का समझौते पर बांग्लादेश की नजर

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने इसी 7 अगस्त को मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इस रक्षा गठबंधन को NATO की तर्ज पर बनाया गया है जिसमें कहा गया है कि तीनों में से किसी भी देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा। इस पैन इस्लामिक आर्थिक और सुरक्षा नेटवर्क में बांग्लादेश के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने इसी सप्ताह इसमें शामिल होने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इन तीनों देशों के साथ आर्थिक या रक्षा समझौते में शामिल होने को तैयार है, लेकिन यह फैसला राष्ट्रीय हितों को जांचने के बाद ही किया जाएगा।

भारत की बढ़ी चिंता

मक्का डिफेंस पैक्ट में बांग्लादेश के शामिल होने की संभावना से भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। खासतौर पर जब इस त्रिस्तरीय समूह में पाकिस्तान और तुर्की जैसे भारत विरोधियों की मौजूदगी है। इस सुरक्षा समूह में बांग्लादेश के शामिल होने से भारत के पूर्वी हिस्से में सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास पाकिस्तान की रणनीतिक पहुंच काफी बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही तुर्की की एडवांस्ड सैन्य तकनीक के लिए भारत के पड़ोस में आने का सीधा रास्ता खुल जाएगा।

भारत के समुद्री दबदबे को चुनौती

इसके साथ ही भारतीय नौसेना के रणनीतिकारों की भी चिंता है। बंगाल की खाड़ी में कई देशों की नौसैनिक मौजूदगी से इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के पारंपरिक समुद्री दबदबे के लिए गंभीर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। ढाका का कहना है कि मक्का समझौते पर विचार करने की इच्छा राष्ट्रीय हित और जियो-पॉलिटिकल संबंधों में विविधता लाने की चाहत से प्रेरित है। लेकिन खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि इसके पीछे पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी ISI की पर्दे के पीछे की गई बातचीत है।
शेख हसीना के जाने के बाद से ISI ने बांग्लादेश में तेजी से अपनी पैठ बढ़ाई है और ढाका के नई दिल्ली से दूर करने की सक्रिय कोशिश की है। इंटेलिजेंस एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ISI और ढाका के बढ़ता सहयोग भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय विद्रोही गुटों के लिए अवैध हथियारों की तस्करी को फिर से शुरू करने का खतरा पैदा कर सकता है।
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