जानकारी के मुताबिक, सिविल लाइन थाना क्षेत्र के गांव लोड़ा बहेड़ी निवासी चंद्रहास ने सदर तहसील के एसडीएम न्यायिक कोर्ट में एक वाद दायर किया था। इसमें लेखराज, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और राज्यपाल को पक्षकार बनाया गया था। चंद्रहास का आरोप था कि उसकी चाची कटोरी देवी की जमीन कुछ रिश्तेदारों ने अपने नाम करा ली है। रिश्तेदारों ने इस जमीन को लेखराज नामक व्यक्ति को बेच दिया। कुछ दिनों बाद इस जमीन के कुछ हिस्से को सरकार की तरफ अधिग्रहण किया गया। अधिग्रहण के बाद लेखराज को 12 लाख रुपये मिले थे। इस याचिका की सुनवाई के दौरान एसडीएम न्यायिक कोर्ट से लेखराज और राज्यपाल को कोर्ट में हाजिर होकर पक्ष रखने के लिए समन जारी किया गया।
राजस्व संहिता की धारा 144 के तहत जारी यह समन जैसे ही राजभवन पहुंचा, हड़कंप मच गया। राज्यपाल के विशेष सचिव ब्रदीनाथ सिंह ने बदायूं के डीएम को पत्र लिखकर आपत्ति जताई। पत्र में कहा गया कि राज्यपाल को यह समन संविधान के अनुच्छेद 361 का उल्लंघन है। विशेष सचिव ने डीएम से कहा कि वह एसडीएम के खिलाफ कड़ा एक्शन ले। साथ ही भविष्य में इस तरह की गलती न दोहराई जाए।











