भोपाल में इसकी जिम्मेदारी शासकीय पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय ने उठाई है। महाविद्यालय के विशेषज्ञों का दल स्कूलों और कालेजों में जाकर विद्यार्थियों को बता रहा है कि हर्बल गार्डन में तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, एलोवेरा और शतावरी जैसे पौधे कैसे लगाए और संभाले जा सकते हैं। साथ ही पौधों की उपयोगिता और औषधीय गुण भी समझाए जा रहे हैं। शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
संस्थान की ओर से आयुर्वेदिक किचन वर्कशाप भी आयोजित हो रही है। इसमें विद्यार्थियों को पौष्टिक और स्वास्थ्यकर व्यंजन तैयार करना सिखाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन से ही प्राकृतिक खानपान और औषधीय पौधों का महत्व समझ में आएगा, तो बच्चे आगे चलकर इन्हें अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना सकेंगे।
औषधीय पौधे जीवन का आधार
अस्पताल के दृव्यगुण विभाग की प्रमुख डॉ. अंजली जैन ने बताया कि हर्बल गार्डन छात्रों को किताबों से परे जाकर प्रत्यक्ष अनुभव देता है। जब बच्चे इन पौधों को लगाते और उनकी देखभाल करते हैं तो वे प्रकृति और स्वास्थ्य के बीच के गहरे संबंध को समझ पाते हैं।











