ढाई साल में 4,500 करोड़ रुपये का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी ढाई वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए 4,500 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। साथ ही 60 नए औद्योगिक क्षेत्र एवं क्लस्टर विकसित किए जाएंगे तथा छह हजार से अधिक भू-खंड नए उद्यमियों को आवंटित किए जाएंगे।
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में सब्सिडी आधारित प्लग-एंड-प्ले को-वर्किंग स्पेस भी विकसित किए जाएंगे, जिससे स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
900 इकाइयों को मिली प्रोत्साहन राशि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से 900 एमएसएमई इकाइयों को 360 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि वितरित की। इसके अलावा 31 मार्च 2026 तक की लंबित देयताओं का भुगतान भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न मदों में सहायता राशि भी जारी की, जिसमें-
- 6 ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) इकाइयों को 2.02 करोड़ रुपये,
- विशेष पैकेज के तहत 1.07 करोड़ रुपये मंडी शुल्क प्रतिपूर्ति,
- 11 इकाइयों को 3.69 करोड़ रुपये विद्युत टैरिफ प्रतिपूर्ति शामिल है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण स्वीकृति, भू-आवंटन पत्र और स्टार्टअप नीति-2025 के अंतर्गत हितलाभ भी वितरित किए गए।
उद्यमियों ने साझा किए अनुभव
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की सभी विधानसभाओं में कम से कम एक एमएसएमाई सेंटर विकसित किया जाएगा।
लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पिछले ढाई साल में औद्योगिक विकास को तेज गति प्रदान की है।
सारवा फोम इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक कुणाल ज्ञानी ने कहा कि हमने भोपाल में फोम बनाने की एक छोटी यूनिट से शुरूआत की थी। आज देश के पांच राज्यों में हमारी इकाइयां हैं और अब यूके में भी एक इकाई खुलने जा रही है।











