दूसरी तरफ तुर्की और सऊदी इस गठबंधन में मिस्र, कतर, कुवैत, जॉर्डन, अजरबैजान और सीरिया को शामिल करने पर विचार कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस गठबंधन ने सऊदी और यूएई के दरार को काफी बढ़ा दिया है। अब सऊदी अरब तुर्की और पाकिस्तान के करीब आ रहा है जबकि UAE ने इजरायल और भारत के साथ अपनी सिक्योरिटी और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत किया है।
सऊदी और यूएई की मक्का समझौते के बाद राहें अलग?
यमन में चल रहे गृहयुद्ध ने पहले ही सऊदी और यूएई को आमने-सामने ला दिया था। यमन में रियाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया है जबकि अबू धाबी ने दक्षिणी अलगाववादी एसटीसी का समर्थन किया है। मक्का समझौते की संयुक्त अरब अमीरात के जाने-माने लोगों ने आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि सऊदी अरब, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) से बाहर जाकर नया संयुक्त रक्षा समझौता क्यों कर रहा है। आपको बता दें कि GCC, सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान का छह देशों वाला समूह है।इसके सदस्यों के बीच पहले से ही एक संयुक्त रक्षा समझौता है जिसके तहत किसी भी GCC देश पर हमले को सभी पर हमला माना जाता है। यह समूह बार-बार इस बात पर जोर देता है कि उसके सदस्यों की सुरक्षा 'अविभाज्य' है। GCC के पास एक एकीकृत सैन्य कमान और रक्षा नीति में तालमेल बिठाने और क्षेत्रीय खतरों से निपटने के लिए सिस्टम भी हैं।सऊदी और यूएई के एक्सपर्ट के बीच तू तू मैं मैं
दुबई के राजनीतिक विश्लेषक और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के पूर्व सहयोगी अब्दुलखालिक अब्दुल्ला ने मक्का समझौते के तर्क पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है 'खाड़ी देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक सहयोग को मजबूत करना और खाड़ी देशों को एकजुट करना कहीं ज्यादा जरूरी है। रियाद को तुर्की और पाकिस्तान को शामिल करने वाली किसी व्यापक व्यवस्था के बजाय मौजूदा खाड़ी ढांचे को प्राथमिकता देनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा टतो फिर इस गठबंधन के देशों का दुश्मन कौन है?'उनकी आलोचना पर सऊदी राजकुमार अब्दुल रहमान बिन मुसैद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रियाद के अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के अधिकार का बचाव किया और सवाल किया। मुसैद ने एक्स पर लिखा 'यह खाड़ी देशों को एकजुट करने की कोशिशों के खिलाफ कैसे हो सकता है? क्या किसी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने हितों को पूरा करने के लिए किसी दूसरे देश या देशों के साथ समझौते करे?'
इसके बाद रियाद स्थित 'असबार सेंटर फॉर स्टडीज़ एंड रिसर्च' के चेयरमैन फहद अल-अरबी अल-हारथी ने भी अमीरात की आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मक्का समझौता किसी खास दुश्मन के खिलाफ बनाया गया गठबंधन नहीं है। इसके बजाय यह समझौता 'रोकथाम और बचाव के लिए सामूहिक क्षमता बनाने और किसी भी तरफ से आने वाले खतरे के बावजूद सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने' के मकसद से किया गया है।
इसके बाद रियाद स्थित 'असबार सेंटर फॉर स्टडीज़ एंड रिसर्च' के चेयरमैन फहद अल-अरबी अल-हारथी ने भी अमीरात की आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने तर्क दिया कि मक्का समझौता किसी खास दुश्मन के खिलाफ बनाया गया गठबंधन नहीं है। इसके बजाय यह समझौता 'रोकथाम और बचाव के लिए सामूहिक क्षमता बनाने और किसी भी तरफ से आने वाले खतरे के बावजूद सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने' के मकसद से किया गया है।
