वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी सजित प्रेमदासा और वर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को 19-19 फीसदी वोट मिले। विश्लेषकों का मानना है कि मतदान के इस रुझान से पता चलता है कि दिसानायके को कुल वोटों में से 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिलने की संभावना है। अगर वह जीतते हैं तो वह श्रीलंका के पहले मार्क्सवादी राष्ट्रपति होंगे। श्रीलंका के चुनाव पर भारत की भी नजर है। दिसानायके भारतीय कंपनी अडानी ग्रुप के खिलाफ भी बयान देते रहे हैं।
भारतीय कंपनी का किया विरोध
भारत के पक्ष में होंगे दिसानायके?
हालांकि उनकी पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि वह भारत के साथ भी होंगे। द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक NPP की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्यों में से एक प्रोफेसर अनिल जयंती ने कहा, 'हमारी पार्टी और नेता भारत से जुड़ना चाहते हैं। भारत निश्चित तौर पर हमारा पड़ोसी और महाशक्ति है। हाल ही में हमें भारत की ओर से एक कृषि सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था। हमने दिल्ली और केरल का दौरा किया। हमारे नेता श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था को स्थिक करने के लिए सभी प्रमुख पावर से जुड़ रहे हैं।'











