अनिरुद्ध आचार्य के भ्रमित अचार विचार

अनिरुद्ध आचार्य के भ्रमित अचार विचार
शो मेन की तरह उनका रंग रूप और मेकअप कैसा रहता है सभी जानते हैं वह कथा वाचक है गले में चमकदार मालाए चमकदार कपड़े चमकदार साफा लगाना पूरे ललाप पर लेप और लंबा तिलक लगाना यह दर्शाता है कि वे अपने आप को भगवान जैसा या भगवान के करीब का दिखाना चाहते हैं। इस जमाने में साइंस शिक्षा से अंतरिक्ष, मंगल और चांद पर जा रहे है। अनिरुद्ध आचार्य कहते हैं कि महिलाएं मेकअप करती है जिससे पुरुषों आकर्षित होते है तो अनिरुद्ध आचार्य आप मेकअप कर किसे आकर्षित करना चाहते हो आप क्यों नहीं सादा सिम्पल रहते हो। आप कहते हो महिलाओं की 14 साल में शादी होना चाहिए आप पागल तो नहीं हो गए आप कहते हो की शादी नहीं होगी तो 25 साल की उम्र तक कुछ बच्चियों चार जगह मुंह मार लेगी तो जिन लोगों के साथ संबंध रखेगी उनको कुछ नहीं कहते हो। आप कहते हो कि महिलाओं का काम है परिवार संभालना बच्चों को पालना, भारत सरकार कहती है की महिलाओं को बराबर का दर्जा मिले हर जगह उसकी बराबर भागीदारी हो और आप महिलाओं को चूल्हा चौकी की बातें कर रहे हो, बंद करो अपनी यह बेफिजूल बातें और जनता भी बेवकूफ है जो उनकी फालतू बातें सुनने जाती है। यह बात सही है कि भारत में एक धार्मिक आस्था का उत्साह पैदा हो चुका है, नतीजन वह हर किसी ऐसे व्यक्ति को भगवान स्वरूप मान लेते हैं। भगवान श्री कृष्णा का मेकअप करने पर वह भगवान श्री कृष्णा नहीं है वह आपको मेकअप के बहाने धोखा दे रहे हैं, वास्तविक संत की परिभाषा यह है कि वह जन सेवा और कल्याण का व्यवहार रखें। वीडियो रील बनाकर टीवी माना जाता है मोबाईल पर पब्लिसिटी करने वाले शोमैन होते हैं और उनका लक्ष्य पैसा कमाना होता है। अनिरुद्ध महिलाओं के छोटे कपड़े पर आपत्ति जताते हैं वह विदेश में बीच पर क्या देखते हैं वहां तो महिला बिल्कुल छोटे कपड़ों (बिकनी) में रहती है पर वहां के लोगों की मानसिकता अच्छी है वे उसको गलत दृष्टि से नही देखते। हमारे यहां की मानसिकता गलत बना रखी है उसे बदलना होगा महिला कैसे भी कपड़े पहने आपकी मानसिकता क्या है आपकी पारंपरिक संस्कृति और घर परिवार की क्या शिक्षा है उस पर ध्यान दे। 
-अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)
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