एसईसीआई ने निविदा प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। रिलायंस पावर की सहायक कंपनी होने के नाते रिलायंस एनयू बीईएसएस ने अपनी मूल कंपनी की ताकत का उपयोग करके वित्तीय योग्यता की आवश्यकताओं को पूरा किया था। मामले की विस्तृत जांच करने पर यह निष्कर्ष निकालना तर्कसंगत पाया गया कि कंपनी द्वारा लिए गए सभी वाणिज्यिक निर्णय मूल रूप से मूल कंपनी द्वारा संचालित थे। इस प्रकार मूल कंपनी यानी रिलायंस पावर को SECI द्वारा जारी भविष्य की निविदाओं में भाग लेने से रोकना अनिवार्य हो गया।
कंपनी का तर्क
रिलायंस एनयू बीईएसएस अपनी सहायक कंपनी महाराष्ट्र एनर्जी जेनरेशन के माध्यम से सफल बोलीदाताओं में से एक थी और उसने सबसे कम बोलियों में से एक बोली लगाई थी। एसईसीआई के इस फैसले से रिलायंस पावर की मुश्किल बढ़ सकती है। कंपनी अपना कर्ज कम करने में लगी है और साथ ही पूंजी भी जुटा रही है। हाल में उसकी सहायक कंपनी रोजा पावर कर्ज-मुक्त हुई है। रिलायंस पावर ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर रही है। बीएसई पर कंपनी का शेयर बाजार खुलते ही लोअर सर्किट में चला गया। इससे पहले लगातार दो दिन इसमें अपर सर्किट लगा था।











