भारत नियमित रूप से कई देशों के साथ बड़े द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास करता है। जैसे अमेरिका के साथ 'युद्ध अभ्यास' और 'वज्र प्रहार', फ्रांस के साथ'वरुण', 'शक्ति' और 'गरुड़', जापान के साथ 'वीर गार्डियन', नेपाल, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मंगोलिया और रूस के साथ भी अलग अलग युद्धाभ्यास शामिल हैं।
लेकिन भारत के प्रमुख सुरक्षा और रक्षा साझेदारों में से एक इजरायल उन देशों की सूची में लगातार शामिल नहीं है जिनके साथ भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। ये काफी हैरान करने वाला है क्योंकि दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं और इजरायल भारत को हथियार बेचने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। इसके अलावा इजरायल भारी मात्रा में भारत से हथियार खरीदता भी है। सिप्री की रिपोर्ट के मुताबिक 2021 और 2025 के बीच रूस और फ्रांस के बाद इजरायल ने भारत के हथियार आयात का 15% हिस्सा सप्लाई किया था।
भारत और इजरायल संयुक्त युद्धाभ्यास का तंत्र नहीं
ऐसा नहीं है कि भारत और इजरायल के बीच कभी संयुक्त सैन्य अभ्यास नहीं हुए हैं। 2009 में भारतीय नौसेना के INS ब्रह्मपुत्र (जो इजरायली बराक मिसाइलों से लैस गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है) उसने हाइफा का चार दिन का सद्भावना दौरा किया था। वहां पहुंचने पर इसने इजरायली नौसेना के साथ PASSEX (पासिंग एक्सरसाइज) किया। 2017 और 2021 में भारतीय वायु सेना (IAF) ने इजरायल की तरफ से आयोजित 'एक्सरसाइज ब्लू फ्लैग' में हिस्सा लिया था।2017 में IAF ने एक C-130J सुपर हरक्यूलिस और 45 सदस्यों का दल जिसमें गरुड़ कमांडो भी शामिल थे उन्हें इजरायल भेजा था और कॉम्बैट सर्च-एंड-रेस्क्यू, दुश्मन के इलाके में कर्मियों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने और विपरीत परिस्थितियों वाले इलाके में जीवित रहने जैसे संयुक्त अभ्यास किए थे। 2021 में IAF ने मिराज 2000 लड़ाकू विमान भेजे। इसके अलावा 2017 में भारतीय नौसेना ने इजरायली नौसेना के साथ एक संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया था। लेकिन ये अभ्यास बहुत कम समय के लिए और सांकेतिक ही हुए हैं।
दोनों देशों ने अभी तक नियमित द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास का कोई सिस्टम नहीं बनाया है। हालांकि इससे ऐसा नहीं है कि ये कोई कमजोर रिश्ते की निशानी है लेकिन इजरायल के भारत के बड़े सैन्य अभ्यासों में शामिल न होने के पीछे रणनीतिक पसंद, भू-राजनीतिक संवेदनशीलता और ऑपरेशन से जुड़े अंतर जैसे कई सोच-समझकर लिए गए फैसले हैं।
