यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस नेवी के इस दस्तावेज में कहा है कि चीन ने अपनी सेनाओं को 2027 तक युद्ध के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है, ऐसे में हमें इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है। यूएस नेवी अपने प्लान के दो प्रमुख उद्देश्य बताती है। एक- 2027 तक चीन के साथ संभावित संघर्ष की तैयारी करना और दूसरा- दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नेवी ने प्रोजेक्ट 33 बनाया है।
प्रोजेक्ट 33: नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करना
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में यूएस की नौसेना ने ड्रोन और रोबोटिक युद्ध के लिए एक नई भूमिका स्थापित की और पश्चिम एशिया में मानव रहित संचालन के लिए एक यूनिट बनाई है। इसके बाद प्रमुख युद्धक्षेत्र पर सफलता के लिए कमांड सेंटर स्थापित करना और तट से बिजली का समर्थन और प्रोजेक्ट करने वाले महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बहाल करना शामिल है।
यूएस नेवी का यह रणनीतिक दस्तावेज चीन और ताइवान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है। 1949 में ताइवान की आजादी के बावजूद चीन इसे अपने हिस्से के रूप में देखता है। चीन से भी कह चुका है कि बलपूर्वक वह ताइवान को साथ मिलाएगा। ताइवान की आजादी के हिमायती और चीन के दावों को खारिज करने वाले लाई चिंग-ते के सत्ता में आने के बाद चीन काफी चिढ़ा हुआ है।
चीन की नौसैनिक क्षमताओं में बीते कुछ वर्षों में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में चीन के साथ संभावित संघर्ष में ताइवान का साथ देने के लिए अमेरिका को बी मजबूत नौसैनिक क्षमताओं की आवश्यकता होगी। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की 2024 की एक रिपोर्ट से पता चला है कि चीन की नौसेना ने 2015 और 2020 के बीच युद्धक जहाजों की संख्या में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। इसने अमेरिकी चिंताओं को बढ़ाया है।
ताइवान पर हमलावर रहा है चीन
चीन की नौसैनिक क्षमताओं में बीते कुछ वर्षों में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में चीन के साथ संभावित संघर्ष में ताइवान का साथ देने के लिए अमेरिका को बी मजबूत नौसैनिक क्षमताओं की आवश्यकता होगी। अमेरिकी कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की 2024 की एक रिपोर्ट से पता चला है कि चीन की नौसेना ने 2015 और 2020 के बीच युद्धक जहाजों की संख्या में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। इसने अमेरिकी चिंताओं को बढ़ाया है।











