राजस्व मंत्रालय फिलहाल बीजेपी ने कद्दावर नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के पास है। ऐसे में उनसे एक विभाग छीनकर दूसरे को देने का जोखिम लेने के मूड में बीजेपी नजर नहीं आ रही है। अगर अजित पवार को राजस्व विभाग दिया गया तो कैबिनेट में राधाकृष्ण विखे पाटिल की अहमियत कम हो जाएगी। इससे विखे पाटिल के नाराज होने की भी आशंका है।
अजित पवार का विरोध क्यों कर रहा है एकनाथ शिंदे गुट?
इस टकराव की शुरुआत महाविकास अघाड़ी सरकार से हुई थी। उस समय अजित पवार राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री भी थे। तब एकनाथ शिंदे गुट ने यह आरोप लगाया था कि अजित पवार ने जानबूझकर उनके विधायकों फंड नहीं दिया। इसके अलावा शिंदे गुट के विधायकों ने यह भी कहा था कि वे सिर्फ इसलिए शिवसेना नहीं छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें फंड नहीं मिल रहा है। बल्कि उन्हें एनसीपी के साथ सत्ता में रहना ही नहीं है। शिंदे गुट को इस बात का भी डर है कि अजित पवार को वित्त मंत्री का पद देने से कहीं दोबारा उन्हें फंड मिलने की दिक्कत न आए।
इस टकराव की शुरुआत महाविकास अघाड़ी सरकार से हुई थी। उस समय अजित पवार राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त मंत्री भी थे। तब एकनाथ शिंदे गुट ने यह आरोप लगाया था कि अजित पवार ने जानबूझकर उनके विधायकों फंड नहीं दिया। इसके अलावा शिंदे गुट के विधायकों ने यह भी कहा था कि वे सिर्फ इसलिए शिवसेना नहीं छोड़ रहे हैं क्योंकि उन्हें फंड नहीं मिल रहा है। बल्कि उन्हें एनसीपी के साथ सत्ता में रहना ही नहीं है। शिंदे गुट को इस बात का भी डर है कि अजित पवार को वित्त मंत्री का पद देने से कहीं दोबारा उन्हें फंड मिलने की दिक्कत न आए।











