बगाई ने जल्द ही किसी बड़ी सफलता मिलने की खबरों को सीधे तौर पर खारिज करते हुए कहा कि बातचीत अभी किसी अंतिम समाधान के "करीब" भी नहीं पहुंची है। उन्होंने आगे कहा कि यह अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है कि क्या कोई युद्धविराम "कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर" औपचारिक रूप ले पाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की एक गहरी और पुरानी कमी बनी हुई है जो अतीत में हुए युद्धविराम उल्लंघनों और खाड़ी क्षेत्रों में लगातार जारी सैन्य जमावड़े के कारण और भी बढ़ गई है।"
'अमेरिका और ईरान किसी समझौते से काफी दूर'
न्यूज 18 ने शीर्ष खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि शांति प्रक्रिया पूरी तरह से एक अप्रत्यक्ष ढांचे के जरिए आगे बढ़ रही है। इन बेहद संवेदनशील बातचीत में फिलहाल पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और इसमें औपचारिक संदेश और कूटनीतिक दस्तावेज सीधे आमने-सामने की बातचीत के बजाय मध्यस्थों के जरिए ही भेजे-मंगाए जा रहे हैं। ईरानी नेतृत्व इस समय वाइट हाउस से मिले सबसे ताजा जवाब की समीक्षा कर रहा है। यह जवाब तेहरान की तरफ से इस महीने की शुरुआत में संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए पेश किए गए 14-सूत्रीय व्यापक शांति प्रस्ताव के संदर्भ में आया है।वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि मौजूदा कूटनीतिक बातचीत का दायरा बेहद सीमित है। बातचीत को तत्काल टूटने से बचाने के लिए दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से जटिल और दीर्घकालिक विवादों को फिलहाल किनारे रखने का फैसला किया है। इसका मुख्य मकसद फिर से लड़ाई शुरू होने से रोकना, स्थानीय स्तर पर सैनिकों को पीछे हटाना, होर्मुज स्ट्रेट से फिर से जहाजों की आवाजाही बहाव करना और क्षेत्रीय शांति स्थापित करना है। इसके अलावा परमाणु विवाद को फिलहाल किनारे पखा गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बगाई ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि शांति प्रक्रिया के इस चरण में परमाणु मुद्दे से जुड़े विशिष्ट विवरणों पर न तो सक्रिय रूप से चर्चा की जा रही है और न ही उनका मूल्यांकन किया जा रहा है।











