पाकिस्तान का जल संकट
पाकिस्तान के जल संकट को समझने के लिए कुछ आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। विभिन्न मानकों के आधार पर पाकिस्तान वर्तमान में दुनिया के 15वें सबसे अधिक जल संकटग्रस्त देश के रूप में है। विश्व वन्यजीव कोष-पाकिस्तान (WWF-P) के अनुसार, देश की वार्षिक प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1947 में लगभग 5,600 घन मीटर से गिरकर 2023 में केवल 930 घन मीटर रह गई है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, पाकिस्तान का जल संकट विश्व स्तर पर सबसे अधिक है, जो बताता है कि यह अब राष्ट्रीय अस्तित्व का प्रश्न है।भारत से मिलने वाले पानी पर निर्भर पाकिस्तान
पाकिस्तान में पानी की कमी केवल घरेलू मुद्दा नहीं है। यह एक क्षेत्रीय भू-राजनीतिक विवाद का विषय है। भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को निर्धारित करने वाली यह संधि खतरे का सामना कर रही है। इस संधि के तहत पाकिस्तान को भारत से आने वाली सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी पर अधिकार मिला था, जो पाकिस्तान के सिंचाई जल का 80 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। इसके साथ ही पाकिस्तान की बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग एक तिहाई इससे मिलता है।यही वजह है इसी साल 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने कड़ा कदम उठाते हुए संधि को स्थगित करने की घोषणा की, जिससे पाकिस्तान में खलबली मच गई। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर भारत एकतरफा तौर पर पानी रोक लेता है, तो पंजाब और सिंध में पाकिस्तानी कृषि क्षेत्रों को पानी की उपलब्धता में 35 प्रतिशत तक कमी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति पाकिस्तान के लिए किसी बुरे सपने की तरह है, जिसकी अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति इन नदियों से जुड़ी हुई है।











