जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास के नेतृत्व वाले सनातन संस्थान मलूक पीठ में मलूक दास जयंती कार्यक्रम में मोहन भागवत की उपस्थिति केवल औपचारिक नहीं थी। इस उपस्थिति ने ब्रज क्षेत्र के धार्मिक नेतृत्व के साथ संघ के जुड़ाव को जगजाहिर किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मलूक पीठ पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि मोहन भागवत का यह दौरा इस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण हो जाता है कि मथुरा को अयोध्या और काशी के साथ हिंदू सभ्यतागत त्रिकोण के हिस्से के रूप में पेश किया जा रहा है।
अयोध्या-काशी के बाद संघ की नजर मथुरा पर, यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मोहन भागवत के दौरों के मायने जानिए
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपनी तैयारियों में जुट गया है। चुनाव से पहले संघ की नजर अयोध्या और काशी के बाद अब मथुरा पर है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को मथुरा में थे। 15 दिनों के भीतर यह उनका दूसरा मथुरा दौरा है। इस साल जनवरी से अब तक वह तीन बार यहां आ चुके हैं। यह दौरा आरएसएस की उस रणनीति को बताता है जिसके तहत वह ब्रज क्षेत्र को अगले विधानसभा चुनावों से पहले वैचारिक एकीकरण और सांगठनिक विस्तार का केंद्र बनाना चाहता है।
जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास के नेतृत्व वाले सनातन संस्थान मलूक पीठ में मलूक दास जयंती कार्यक्रम में मोहन भागवत की उपस्थिति केवल औपचारिक नहीं थी। इस उपस्थिति ने ब्रज क्षेत्र के धार्मिक नेतृत्व के साथ संघ के जुड़ाव को जगजाहिर किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मलूक पीठ पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि मोहन भागवत का यह दौरा इस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण हो जाता है कि मथुरा को अयोध्या और काशी के साथ हिंदू सभ्यतागत त्रिकोण के हिस्से के रूप में पेश किया जा रहा है।
जगद्गुरु द्वाराचार्य स्वामी राजेंद्र दास के नेतृत्व वाले सनातन संस्थान मलूक पीठ में मलूक दास जयंती कार्यक्रम में मोहन भागवत की उपस्थिति केवल औपचारिक नहीं थी। इस उपस्थिति ने ब्रज क्षेत्र के धार्मिक नेतृत्व के साथ संघ के जुड़ाव को जगजाहिर किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मलूक पीठ पहुंचे। सूत्रों का कहना है कि मोहन भागवत का यह दौरा इस पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण हो जाता है कि मथुरा को अयोध्या और काशी के साथ हिंदू सभ्यतागत त्रिकोण के हिस्से के रूप में पेश किया जा रहा है।











