इसरो का आदित्य-L1 स्पेसक्राफ्ट 126 दिनों में 15 लाख किमी का सफर तय करने के बाद सन-अर्थ लैग्रेंज पॉइंट 1 (L1) तक पहुंच जाएगा। आज शाम करीब 4 बजे इसके हेलो ऑर्बिट में पहुंचने की उम्मीद है। ये मिशन 5 साल का होगा।
स्पेसक्राफ्ट में 440N लिक्विड अपोजी मोटर (LAM) लगी है, जिसकी मदद से आदित्य-L1 को हेलो ऑर्बिट में भेजा जाएगा। यह मोटर इसरो के मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) में इस्तेमाल की गई मोटर के समान है। इसके अलावा आदित्य-L1 में आठ 22N थ्रस्टर और चार 10N थ्रस्टर हैं, जो इसके ओरिएंटेशन और ऑर्बिट को कंट्रोल करने के लिए जरूरी हैं।
L1 अंतरिक्ष में ऐसा स्थान है, जहां पृथ्वी और सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्तियां संतुलित होती हैं। हालांकि, L1 तक पहुंचना और स्पेसक्राफ्ट को इस ऑर्बिट में बनाए रखना कठिन टास्क है। L1 का ऑर्बिटल पीरियड करीब 177.86 दिन है।
दित्य-L1 का 4 हिस्सों में सफर:
1. स्पेसक्राफ्ट की लॉन्चिंग
आदित्य L1 को 2 सितंबर को सुबह 11.50 बजे PSLV-C57 के XL वर्जन रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। लॉन्चिंग के 63 मिनट 19 सेकेंड बाद स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की 235 Km x 19500 Km की कक्षा में स्थापित कर दिया था।
2. चार बार ऑर्बिट चेंज
पहली बार इसरो के वैज्ञानिकों ने 3 सितंबर को आदित्य L1 की ऑर्बिट बढ़ाई थी। उसकी पृथ्वी से सबसे कम दूरी 245 Km, जबकि सबसे ज्यादा दूरी 22,459 Km हो गई थी।
5 सितंबर को रात 2.45 बजे आदित्य L1 स्पेसक्रॉफ्ट की ऑर्बिट दूसरी बार बढ़ाई गई थी। उसकी पृथ्वी से सबसे कम दूरी 282 Km, जबकि सबसे ज्यादा दूरी 40,225 Km हो गई।
इसरो ने 10 सितंबर को रात करीब 2.30 बजे तीसरी बार आदित्य L1 की ऑर्बिट बढ़ाई थी। उसकी पृथ्वी से सबसे कम दूरी 296 Km, जबकि सबसे ज्यादा दूरी 71,767 Km हो गई।
इसरो ने 15 सितंबर को रात करीब 2:15 बजे चौथी बार आदित्य L1 की ऑर्बिट बढ़ाई थी। उसकी पृथ्वी से सबसे कम दूरी 256 Km, जबकि सबसे ज्यादा दूरी 1,21,973 Km हो गई।
3. ट्रांस-लैग्रेंजियन इंसर्शन
आदित्य L1 स्पेसक्राफ्ट को 19 सितंबर को रात करीब 2 बजे ट्रांस-लैग्रेंजियन पॉइंट 1 में पहुंचाया गया। इसके लिए यान के थ्रस्टर कुछ देर के लिए फायर किए गए थे। ट्रांस-लैग्रेंजियन पॉइंट 1 इंसर्शन यानी यान को पृथ्वी की कक्षा से लैग्रेंजियन पॉइंट 1 की तरफ भेजना।
4. L1 ऑर्बिट इंसर्शन
ट्रांस-लैग्रेंजियन पॉइंट 1 इंसर्शन के बाद स्पेसक्राफ्ट को अपने पाथ पर बनाए रखने के लिए 6 अक्टूबर 2023 को ट्रैजेक्ट्री करेक्शन मेनोवर (टीसीएम) किया गया था। अब अंतिम चरण की प्रक्रिया होगी और स्पेसक्राफ्ट L1 ऑर्बिट के चक्कर लगाना शुरू कर देगा।











