बगीचे में खड़े रहते थे सोने की ईंटो से भरे ट्रक
हुज़ूर-ए-निज़ाम के नाम से मशहूर मीर उस्मान अली खान (Hyderabad Nizam Mir Osman Ali Khan) के पास बहुमूल्य रत्नों की खान थी। बताया जाता है कि सोने की ईंटों से भरे ट्रक उसके बगीचे में खड़े रहते थे। निज़ाम ऐसे संस्थानों के मालिक थे, जहां सोने के बर्तनों में खाना परोसा जाता था। बताया जाता है कि निजाम को महंगी गाड़ियों का शौक था। रोल्स-रॉयस मोटर कार्स लिमिटेड ने मीर उस्मान को अपनी कार बेचने से इनकार कर दिया, तो हैदराबाद के शासक ने कुछ पुरानी रोल्स-रॉयस कारों को खरीद लिया और वे उसे कचरा फेंकने के लिए इस्तेमाल करने लगे थे।खुद का बैंक बनवाया
निज़ाम ने अपना खुद का बैंक, 'हैदराबाद स्टेट बैंक' बनवाया था। इस बैंक में उनके द्वारा जारी उस्मानिया सिक्के चला करते थे। बाद में इस बैंक का नाम बदलकर 'स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद' कर दिया गया। इसके बाद साल 2017 में भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया गया था। हैदराबाद के आखिरी निजाम के लिए दावे तो यहां तक किए जाते हैं कि वो दुनिया के सबसे अमीर शख्स थे। टाइम मैग्जीन ने भी कवर पर उनकी फोटो छापी थी और उन्हें सबसे दौलतमंद शख्सियतों में गिना गया था। माना जाता है कि उस समय उनके पास बेहिसाब संपत्ति थी।10 दौलतमंद लोगों में शुमार
80 और 90 के दशक तक निजाम दुनिया के 10 सबसे दौलतमंद लोगों में शुमार होते थे। वैसे तो उनकी संपत्ति को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि आजादी के दौर में भी वो 130 अरब रुपये के मालिक थे। निजाम मीर उस्मान अली खान को अन्य निजामों की तरह ज्यादा शौक नहीं थे और वो कपड़ों आदि पर ज्यादा खर्च नहीं करते थे। ऐसा कहा जाता है कि उनके पास एक पेपरवेट था, जो 185 कैरेट हीरे से बना था। इसके अलावा उनके शौक ज्यादा लग्जरी नहीं थे।कंजूसी के लिए मशहूर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निजाम कंजूसी के लिए भी काफी मशहूर थे। जब भी वो किसी को अपने यहां बुलाते थे, उनको बहुत कम खाना परोसा जाता था। चाय पर भी दो बिस्किट दिए जाते थे और वो खुद भी महंगी सिगरेट की जगह सस्ती सिगरेट पीने के शौकीन थे।











