चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने बताया कि कवर्धा केवल विकास के मामले में आगे बढ़े, ऐसा नहीं बल्कि शहर की पहचान उसकी संस्कृति, धार्मिक आस्था, हरियाली और सुंदरता से भी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ शहर में ऐसे स्थानों का विकास किया जा रहा है, जहां नागरिकों को बेहतर वातावरण के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव भी महसूस हो। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना भारतीय संस्कृति में शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। शिव वाटिका का निर्माण इसी भावना को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। वाटिका को आकर्षक स्वरूप प्रदान करने के साथ यहां हरियाली, सुंदर पाथवे, पुष्प सज्जा, बैठने की व्यवस्था, आकर्षक विद्युत प्रकाश, बच्चों के झूला, ओपन जीम सहित नागरिकों के उपयोग की आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इस तरह शिव वाटिका केवल एक उद्यान नहीं बल्कि कवर्धा के सौंदर्यीकरण का प्रमुख केंद्र बनेगी।
सुबह-शाम स्वास्थ्य और सुकून का केंद्र बनेगी वाटिका
शिव वाटिका को केवल धार्मिक एवं सौंदर्यीकरण के उद्देश्य तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। सुबह और शाम शहरवासी यहां टहलने, बैठने और प्रकृति के बीच समय बिताने का आनंद ले सकेंगे। हरियाली से भरपूर वातावरण लोगों को स्वस्थ एवं सकारात्मक माहौल प्रदान करेगा। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों के लिए भी यह स्थान उपयोगी साबित होगा। यहां विकसित किए जाने वाले पाथवे और अन्य सुविधाएं नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराने में सहायक होंगी।
कवर्धा की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई मजबूती
कवर्धा की पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में प्रदेशभर में है। भोरमदेव मंदिर, बूढ़ामहादेव सहित अनेक धार्मिक स्थलों से जुड़ी आस्था को देखते हुए शहर में भगवान शिव के नाम पर बनने वाली यह वाटिका धार्मिक पर्यटन और शहर के सौंदर्यीकरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने कहा कि “कवर्धा की पहचान केवल एक सुंदर शहर के रूप में नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और संस्कारों से जुड़े शहर के रूप में भी होनी चाहिए। शिव वाटिका इसी सोच का हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि शहरवासियों को ऐसे सुंदर और व्यवस्थित स्थान मिलें, जहां वे परिवार के साथ कुछ समय सुकून से बिता सकें और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ सकें।”
सुबह-शाम स्वास्थ्य और सुकून का केंद्र बनेगी वाटिका
शिव वाटिका को केवल धार्मिक एवं सौंदर्यीकरण के उद्देश्य तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे नागरिकों के लिए उपयोगी सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। सुबह और शाम शहरवासी यहां टहलने, बैठने और प्रकृति के बीच समय बिताने का आनंद ले सकेंगे। हरियाली से भरपूर वातावरण लोगों को स्वस्थ एवं सकारात्मक माहौल प्रदान करेगा। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों के लिए भी यह स्थान उपयोगी साबित होगा। यहां विकसित किए जाने वाले पाथवे और अन्य सुविधाएं नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराने में सहायक होंगी।
कवर्धा की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई मजबूती
कवर्धा की पहचान धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी के रूप में प्रदेशभर में है। भोरमदेव मंदिर, बूढ़ामहादेव सहित अनेक धार्मिक स्थलों से जुड़ी आस्था को देखते हुए शहर में भगवान शिव के नाम पर बनने वाली यह वाटिका धार्मिक पर्यटन और शहर के सौंदर्यीकरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगी। नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी ने कहा कि “कवर्धा की पहचान केवल एक सुंदर शहर के रूप में नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और संस्कारों से जुड़े शहर के रूप में भी होनी चाहिए। शिव वाटिका इसी सोच का हिस्सा है। हमारा प्रयास है कि शहरवासियों को ऐसे सुंदर और व्यवस्थित स्थान मिलें, जहां वे परिवार के साथ कुछ समय सुकून से बिता सकें और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ सकें।”
