कतर में पिछले साल मौत की सजा पाने वाले भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अफसरों को नई जिंदगी मिल गई है। इन सभी को कतर सरकार ने रिहा कर दिया है। इनमें से 7 सोमवार तड़के भारत लौट आए। इनकी सुरक्षित वतन वापसी किस शर्त पर हुई, इस बारे में कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है।
पहले मौत की सजा, फिर उम्रकैद और अब वतन वापसी। यह कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। जासूसी के जुर्म में सजा पाने वाले 8 पूर्व नेवी अफसरों की भारत वापसी का मिशन बेहद गोपनीय रखा गया। गोपनीयता इतनी कि नौसैनिकों के परिवारों को भी इसकी भनक नहीं लगी।
रिहा होकर लौटे एक पूर्व अफसर ने कतर में रह रही अपनी पत्नी को फोन से सूचना दी। कहा- मैं भारत लौट आया हूं, अब तुम भी लौट आओ। सूत्रों के मुताबिक, उम्रकैद की सजा के बावजूद किसी को भी जेल में नहीं रखा गया। वे पूरे वक्त हिरासत केंद्र में रहे। दो-दो अधिकारी साथ रहते थे। डॉक्टर भी दिया गया था। परिवार का एक सदस्य हर हफ्ते इनसे मिल सकता था। हिरासत केंद्र में इनके लिए जिम की व्यवस्था भी थी।
आगे क्या... अब मोदी 14 को कतर जाएंगे
जिनकी रिहाई हुई, उनमें कैप्टन नवतेज सिंह गिल, बीरेंद कुमार वर्मा, सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, पुर्णेंदु तिवारी, सुगनाकर पकाला, संजीव गुप्ता और सेलर रागेश शामिल हैं। विदेश सचिव ने विनय क्वात्रा ने बताया कि पुर्णेंदु की वापसी नहीं हुई है। उनके लिए कतर सरकार से बातचीत चल रही है।
विदेश सचिव के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी अपने स्तर पर इस मामले में पूरी निगरानी रखे हुए थे। अब प्रधानमंत्री 14 फरवरी को कतर जाएंगे। मोदी का 13-14 फरवरी को UAE का दौरा पहले से तय था, लेकिन कतर जाना सार्वजनिक नहीं किया गया था।
पुर्णेंदु की बहन बोलीं- सुबह 4 बजे मिली रिहाई की खबर; उम्मीद- जल्द लौटेंगे
कमांडर पुर्णेंदु तिवारी की बहन डॉ. मीतू भार्गव ग्वालियर में रहती हैं। उन्होंने बताया कि भाई की रिहाई की खबर हमें सोमवार सुबह 4 बजे मिली। बहन और बहनोई आशीष भार्गव ने कहा- उन पर ट्रैवल पाबंदी है। उम्मीद है कि वे जल्द लौटेंगे। भोपाल में रह रहे छोटे भाई ने पुर्णेंदु से फोन पर बात भी की। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और सकुशल हैं। बता दें कि पुर्णेंदु को सबसे ज्यादा 25 साल की सजा मिली थी।
बीते हफ्ते LNG समझौता
पिछले हफ्ते भारत-कतर के बीच लिक्विफाइड नेचुरल गैस को लेकर 78 अरब डॉलर का समझौता हुआ। कतर 20 साल तक सालाना 75 लाख टन एलएनजी भारत को देगा।
एक नजर में पूरा मामला
- आठों भारतीय दोहा में रक्षा सेवा प्रोवाइडर कंपनी अल दहरा में थे।
- इन्हें 30 अगस्त 2022 को कतर की इंटेलिजेंस ने गिरफ्तार किया था।
- जासूसी के आरोप लगाए गए।26 अक्टूबर 2023 को लोअर कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।
- दिसंबर में मोदी ने दुबई में कतर के अमीर शेख से मुलाकात की।
- 28 दिसंबर 2023 को मुलाकात का असर दिखा। फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी गई।
- सजा के खिलाफ अपील के लिए 60 दिन थे, लेकिन पहले ही रिहा।











