विद्यार्थियों के सपनों को पंख लगाएगी ई-स्कूटी: मंत्री उदय प्रताप सिंह
कार्यक्रम के दौरान स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि इन मेधावी बच्चों ने अपने कठिन परिश्रम से परिवार और समाज का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के अन्य सभी स्कूली बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उन्होंने कहा, "यह पेट्रोल और ई-स्कूटी बच्चों के भविष्य को पंख लगाएगी और उनके सपनों को पूरा करने में मददगार साबित होगी। हमारी सरकार गुणवत्तापूर्ण और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विद्यार्थियों को श्रेष्ठ सुविधाएं देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और युवाओं से संवाद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
स्कूटी मिलने से बढ़ता है सामाजिक मान-सम्मान: CM
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस योजना के माध्यम से बच्चों को स्कूटी मिलने से केवल उनका आवागमन ही सुगम नहीं होता, बल्कि गांव, समाज और परिवार में उनका मान-सम्मान भी बढ़ता है। उन्होंने युवाओं के बदलते दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि आज के बच्चे केवल नौकरी के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि स्टार्टअप शुरू करने का भी सपना देख रहे हैं।
विपक्ष पर भी कसा तंज
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के शासनकाल पर चुटकी लेते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय बच्चों को पढ़ाई के लिए घर से बोरा (टाट-पट्टी) लेकर स्कूल जाना पड़ता था। आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज जब राज्य सरकार युवाओं और विद्यार्थियों के बीच जाकर उनसे सीधा संवाद कर रही है, तो विरोधी दलों को भी जनता के सामने आकर अपने कार्यों का हिसाब देना चाहिए।
22 हजार करोड़ से बढ़कर 38 हजार करोड़ हुआ शिक्षा का बजट
संबोधन के दौरान सीएम ने कहा कि एक समय पूरे मध्य प्रदेश के सभी विभागों का कुल बजट मिलाकर 22,000 करोड़ रुपये हुआ करता था। वहीं आज अकेले स्कूल शिक्षा विभाग का बजट बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता में शिक्षा सबसे ऊपर है।
उन्होंने आगे कहा, 'बजट में हुई इस ऐतिहासिक वृद्धि का ही परिणाम है कि कभी पहली कक्षा में 16 प्रतिशत बच्चों के स्कूल न पहुंच पाने वाले राज्य में आज ड्रॉपआउट दर घटकर जीरो प्रतिशत पर आ गई है। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों के बेहतर होते स्तर के कारण अब 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे निजी स्कूलों से निकलकर सरकारी विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं।'
