दिल्ली में कांग्रेस की महारैली में ग्वालियर से 1000 कार्यकर्ता और नेताओं को ले जाने का लक्ष्य था, लेकिन वहां करीब 300 ही पहुंचे। कार्यकर्ताओं की संख्या लक्ष्य से काफी कम रहने पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने ग्वालियर जिला अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भोपाल मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद जिला संगठन में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जिला अध्यक्ष के निर्देश पर संगठन महामंत्री इब्राहिम पठान ने महारैली में शामिल नहीं होने वाले 26 मंडलम अध्यक्षों और 5 ब्लॉक अध्यक्षों को भी नोटिस जारी किए हैं। सभी से तीन दिन में लिखित जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी संविधान और अनुशासन के तहत कार्रवाई की अनुशंसा भोपाल भेजने की चेतावनी दी गई है।
जिला अध्यक्ष से भी पूछा जाएगा कम भीड़ जुटने का हिसाब
दिल्ली महारैली में निर्धारित संख्या से कम कार्यकर्ताओं के पहुंचने पर अब जिला अध्यक्ष को भी जवाब देना होगा। PCC ने संगठन की तैयारियों और कार्यकर्ताओं को जुटाने में हुई कमी को लेकर जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। नोटिस के बाद ग्वालियर कांग्रेस में हलचल बढ़ गई है।
छोटे पदाधिकारियों पर कार्रवाई, बड़े नेताओं से क्यों नहीं सवाल?
नोटिस मिलने के बाद संगठन के भीतर नाराजगी भी सामने आने लगी है। कुछ पदाधिकारी पारिवारिक और व्यावसायिक कारणों का हवाला देकर जवाब तैयार कर रहे हैं, जबकि कुछ तीखे जवाब देने की तैयारी में हैं।
नाराज पदाधिकारियों का सवाल है कि कार्रवाई केवल मंडलम और ब्लॉक अध्यक्षों तक सीमित क्यों है? कांग्रेस सरकार में मंत्री और विधायक रहे बड़े नेता स्थानीय कार्यक्रमों और दिल्ली महारैली में शामिल नहीं हुए, उनसे जवाब क्यों नहीं मांगा जा रहा?
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई वरिष्ठ नेता सालभर संगठनात्मक गतिविधियों से दूर रहते हैं, लेकिन चुनाव के समय टिकट की दावेदारी के लिए सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में महारैली में कम भीड़ पहुंचने के मामले में केवल छोटे पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने पर संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
दिल्ली महारैली में अपेक्षित संख्या से कम कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद ग्वालियर कांग्रेस में अनुशासन और गुटबाजी का मुद्दा फिर चर्चा में है। अब तीन दिन में मिलने वाले जवाब और PCC की अगली कार्रवाई पर संगठन की नजर है।

