इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के तक्षशिला परिसर में आयोजित ‘Gen-Z चर्चा’ में कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि अब लड़ाई राजपूत और ब्राह्मण जातियों की नहीं, बल्कि Gen-Z और Gen-Alpha की शुरू हो गई है।
उन्होंने युवाओं को राजनीति और संवैधानिक व्यवस्थाओं में लाने की बात भी कही। महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि ये खिलाड़ी इसलिए सफल हुए, क्योंकि वे कभी टूटे नहीं।
युवा बोले- हमें भी सवाल पूछने का मौका मिलना चाहिए था
हर्षिता जायसवाल ने बताया कि कार्यक्रम का अनुभव अच्छा रहा। अगर सवाल पूछने का मौका मिलता, तो वे जानना चाहतीं कि अध्यात्म और पढ़ाई को साथ लेकर कैसे चला जा सकता है और दोनों में सफल कैसे हो सकते हैं। गोविंद ने कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सवाल विरासत से जुड़े होने चाहिए। वहीं, सृष्टि ने बताया कि कार्यक्रम में सब्र करने की बात उन्हें काफी अच्छी लगी।
सफलता के लिए मुश्किलों में टिके रहना जरूरी
इंद्रेश उपाध्याय ने युवाओं के बीच बदलती पीढ़ी और उनकी सोच के संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने धोनी, सचिन और विराट का उदाहरण देते हुए सफलता के लिए मुश्किल परिस्थितियों में डटे रहने के महत्व पर जोर दिया। उनके मुताबिक, इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनका न टूटना भी एक अहम वजह रही।
'देवी अहिल्या ने होलकर वंश ही नहीं, देश में बनाई पहचान'
इंद्रेश उपाध्याय ने देवी अहिल्याबाई होलकर का जिक्र करते हुए कहा कि बहू ऐसी होनी चाहिए, जो शादी से पहले पिता और भाई का सम्मान करे और शादी के बाद ससुराल का नाम रोशन करे। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्याबाई ने न केवल होलकर वंश, बल्कि पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई और नाम रोशन किया।
युवाओं को राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था में लाने की बात
इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि युवाओं को राजनीति और संवैधानिक व्यवस्थाओं में भी लाना चाहिए।
युवाओं को सवाल पूछने का मौका नहीं मिला
हर्षिता जायसवाल ने बताया कि कार्यक्रम का अनुभव काफी अच्छा रहा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सवाल पूछने का मौका मिलता, तो वे पूछतीं कि आध्यात्म और पढ़ाई को साथ लेकर कैसे चला जा सकता है और दोनों में सफल कैसे हुआ जा सकता है।
Gen-Z की क्षमता का इस्तेमाल कम हो रहा
इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि Gen-Z यूजलेस नहीं है, बल्कि उनका उपयोग कम किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे पर भारत सरकार से ध्यान देने की अपील की।
कलयुग में भगवान के नाम से आएगा बदलाव
इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि जिस युग में हम रहते हैं, उसमें भगवान प्रकट नहीं होंगे। कल्कि भगवान बहुत बाद में आएंगे। हमारे आसपास असंख्य रावण और कंस हैं, जिनका नाश करने के लिए भगवान नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान का नाम ही बदलाव लाएगा। बच्चों को एक नाम लेने की आदत डालें और 30 दिन तक रोज भगवान का नाम लेने का ट्रायल करें। 31वें दिन बदलाव देखने को मिलेगा।
इंदौर में ‘Gen-Z चर्चा’ के दौरान कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि आज के युवाओं में सहनशक्ति की कमी है। उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा कि वे इसलिए सफल हुए, क्योंकि मुश्किल परिस्थितियों में कभी टूटे नहीं।

