जोहरा सहगल: हिंदू लड़के से शादी पर बवाल, बच्चे को लेकर पाकिस्तान से भागीं, शादी में था सिर्फ 1 बाराती
भारतीय सिनेमा की दिग्गज एक्ट्रेस और 'लाडली ऑफ द सेंचुरी' कही जाने वालीं जोहरा सहगल की 27 अप्रैल को 114वीं बर्थ एनिवर्सरी है। वह इस कदर जिंदादिल इंसान थीं कि हर किसी को इंस्पायर किया, जबकि उनकी खुद की जिंदगी बहुत ही उतार-चढ़ावों वाली रही। जोहरा सहगल ने जब 8 साल छोटे हिंदू लड़के से शादी की तो बवाल मच गया था,वहीं एक साल की थीं, तो आंखों की रोशनी चली गई थी, पर काफी इलाज के बाद आंखें ठीक हो गई थीं। वहीं, भारत-पाकिस्तान के विभाजन के दौरान दंगे हुए तो जोहरा सहगल को लाहौर से भागकर भारत आना पड़ा था। तब उनकी गोद में नन्हा सा बच्चा भी था। जोहरा सहगल की बर्थ एनिवर्सरी पर उनकी जिंदगी की इसी कहानी के बारे में बता रहे हैं:
रूढ़िवादी परिवार में जन्म
जोहरा सहगल ब्रिटिश काल में उत्तर प्रदेश के एक रूढ़िवादी परिवार में पैदा हुई थीं। पिता का नाम मुमताजउल्ला खान और मां का नाम नतीका बेगम था। घरवाले इस कदर रूढ़िवादी परिवार, जो चाहता था कि जोहरा सहगल की 10वीं के बाद ही शादी कर दी जाए। जबकि जोहरा सहगल पढ़ाई में बेहद अच्छी थीं। साथ ही उन्हें बचपन से ही डांस का भी बहुत शौक था।दुखभरी रही जिंदगी, 1 साल की उम्र में गई आंख की रोशनी
जोहरा सहगल की निजी जिंदगी की बात करें, तो उनकी शुरुआत बहुत दुख भरी रही। एक साल की उम्र में जोहरा की को ग्लूकोमा नाम की बीमारी हो गई थी, जिससे उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद माता-पिता इलाज के लिए उन्हें इंग्लैंड लेकर चले गए। यह साल 1913 की बात है। वहां इलाज के बाद जोहरा सहगल की आंखों की रोशनी लौट आई। यह जोहरा के दुख पर पार पाने का पहला पड़ाव था।
10वीं के बाद घरवाले करवाना चाहते थे शादी
दूसरा पड़ाव तब आया, जब जोहरा सहगल के घरवाले 10वीं की पढ़ाई के बाद उनकी शादी करवाना चाहते थे और आगे पढ़ाना नहीं चाहते थे। जोहरा पढ़ाई में तेज थीं और उनके सभी टीचर्स उन्हें पसंद करते थे। बताया जाता है कि जब जोहरा के स्कूल प्रिंसिपल को इस बार में पता चला तो उन्होंने एक्ट्रेस को 10वीं क्लास में तीन बार फेल कर दिया ताकि शादी होने से रोका जा सके। जोहरा सहगल शादी नहीं करना चाहती थीं, क्योंकि उन्होंने शादी के बाद अपनी बड़ी बहन का हाल देखा था, पर पिता का दबाव था।मामा जोहरा सहगल को यूरोप ले गए, डांस सीखा
फिर जोहरा सहगल को 8 साल छोटे हिंदू लड़के से प्यार हो गया और फिर शादी कर ली। यह साल 1940 की बात है। दरअसल,जब जोहरा सहगल के मामा को उनके डांस के शौक के बारे में पता चला, तो उन्होंने जोहरा के पिता को मनाया और कहा कि बेटी को उसके मन की करने दें। फिर वह जोहरा सहगल को अपने साथ यूरोप ले गए थे। वहां उन्होंने एक डांस स्कूल में एडमिशन ले लिया। वहीं पर जोहरा सहगल मशहूर डांसर और कोरियोग्राफर उदय शंकर से मिली थीं, और फिर उनके डांस ग्रुप का हिस्सा बन गईं। जोहरा ने फिर कई देशों में डांस ग्रुप का हिस्सा बनकर डांस किया और फिर उदय शंकर के साथ ही भारत लौट आईं।कामेश्वर सहगल से प्यार, यह बोलीं थी जोहरा सहगल
भारत आने के बाद जोहरा सहगल उदय शंकर कल्चरल सेंटर में काम करने लगीं, जहां उनकी मुलाकात पेंटर, डांसर और वैज्ञानिक कामेश्वर सहगल से हुई। वक्त के साथ जोहरा को कामेश्वर से प्यार हो गया, जो हिंदू थे और उम्र में एक्ट्रेस से 8 साल छोटे थे। जोहरा सहगल ने अपने 100वें बर्थडे पर अपर्णा गुप्ता को दिए एक इंटरव्यू में बताया था, 'मुझे वह आकर्षक और प्रतिभाशाली लगे। चावल और फफूंद से उन्होंने अपनी जो बर्मी झोपड़ी बनाई थी, उसे देख मैं हैरान रह गई थी। कामेश्वर मुझसे आठ साल छोटे थे, फिर भी उन्होंने मेरी भावनाओं को समझा। हमने इलाहाबाद में सिविल मैरिज की थी, लेकिन रेलवे ट्रैक और सड़कें बंद होने के कारण हमारी शादी में सिर्फ एक ही बाराती था।'शादी के खिलाफ था जोहरा सहगल का परिवार
जोहरा सहगल ने कामेश्वर से शादी कर ली, पर परिवार इस शादी के खिलाफ था। दोनों के परिवार के बीच हालात इतने बिगड़ गए कि बवाल मच गया। लेकिन वक्त के साथ सारी चीजें ठीक हो गईं। फिर जोहरा सहगल पति के साथ पाकिस्तान चली गईं और वहां लाहौर में अपने डांस स्टूडियो की शुरुआत की।पाकिस्तान में डांस स्टूडियो खोला, दंगों के बीच पड़ा भागना
सबकुछ बढ़िया चल रहा था। उनकी एक बच्ची भी थी। दोनों के परिवारवाले भी मान चुके थे, लेकिन भारत-पाकिस्तान का विभाजन होने से पहले जब वहां दंगे हुए तो जोहरा सहगल को पति और बच्ची के साथ वहां से भागना पड़ा। वो मुंबई आ गए और यहां फिर जोहरा सहगल ने पृथ्वी थिएटर में काम करना शुरू कर दिया था।1946 में फिल्मों में एंट्री
फिर साल 1946 में उन्होंने फिल्मों में एंट्री की और पहली फिल्म थी 'नीचा नगर'। यह कान फिल्म फेस्टिवल में जाने वाली भी पहली भारतीय फिल्म थी। जोहरा सहगल ने 8 दशक से भी लंबे समय तक फिल्मों में काम किया और अलग मुकाम बनाया। वह 'दिल से', 'साया', 'वीर जारा', 'सावरिया' और 'चीनी कम' जैसी हिंदी फिल्मों के अलावा कई ब्रिटिश और इंग्लिश फिल्मों में भी नजर आईं।
जोहरा सहगल का 2014 में निधन
जोहरा सहगल को सहगल को 1998 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। साल 2001 में कालिदास सम्मान और 2004 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। फिर साल 2010 में जोहरा सहगल को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। जोहरा 10 जुलाई 2014 को हार्ट अटैक से निधन हो गया।











