उन्होंने कहा कि यह मॉडल भरण-पोषण मामलों में अदालत के आदेश को जमीन पर लागू कराने में प्रभावी साबित हो रहा है। डीजीपी से मुलाकात के दौरान अधिकारियों ने उन्हें अभियान के परिणामों के बारे में जानकारी दी। पुलिस ने 2021 में इस अभियान की शुरुआत की थी।
16 हजार समन तामीली, ताकि आदेश मानें लोग
एडीजी अनिल कुमार के अनुसार अदालत के आदेश के बाद भी नियमित रूप से भरण-पोषण की राशि नहीं देने के मामलों में अदालत द्वारा जारी समन और वारंट की तामीली करवाई जाती है। इससे संबंधित व्यक्ति कोर्ट में पेश होता है या आदेश का पालन करता है। पिछले साल 16,703 समन और वारंट तामील करवाए गए।
जुलाई 2025 से सालभर चल रहा अभियान
शुरुआत में यह अभियान साल में एक बार चलाया जाता था। लेकिन, कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए जुलाई 2025 से इसे सालभर चलने वाली प्रक्रिया बना दिया गया है। महिला सुरक्षा शाखा हर महीने जिलों से रिपोर्ट लेकर इसकी समीक्षा भी कर रही है।
हेल्पिंग हैंड इसलिए खास:
- भरण-पोषण के मामलों में कोर्ट आदेश की तामीली के लिए पुलिस का विशेष अभिया है।
- इसे केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिला की आजीविका से जुड़ा मुद्दा बनाया गया है।
भरण-पोषण की प्रक्रिया:
- महिला अदालत में भरण-पोषण का मामला दर्ज करती है।
- अदालत पति या परिवार को तय राशि देने का आदेश देती है।
- पालन कराने की पूरी जिम्मेदारी के साथ पुलिस पूरे साल काम करती है।
5 साल में 55,803 गुम नाबालिग बेटियां तलाशीं
पुलिस अधिकारियों ने मप्र पुलिस के अन्य अभियानों की जानकारी भी दी। वर्ष 2021 से 2025 के बीच ऑपरेशन मुस्कान के तहत 55,803 गुम नाबालिग बालिकाओं को तलाशा गया। वहीं सेफ क्लिक साइबर जागरूकता अभियान के जरिए 33 लाख से अधिक लोगों को जागरूक किया गया। प्रदेश में फिलहाल 987 महिला हेल्प डेस्क संचालित हैं।











