क्रिकेट में कमाल कर रहे होते Vishal Bhardwaj, पिता और भाई की मौत ने सबकुछ बदल दिया, फिर यूं चमकाई किस्मत

क्रिकेट में कमाल कर रहे होते Vishal Bhardwaj, पिता और भाई की मौत ने सबकुछ बदल दिया, फिर यूं चमकाई किस्मत
विशाल भारद्वाज। इंडियन फिल्म डायरेक्टर, स्क्रीनराइटर, प्रोड्यूसर, म्यूजिक कंपोजर और प्लेबैक सिंगर। आपको जानकर हैरानी होगी कि इन्होंने एक, दो या तीन नहीं, आठ नेशनल अवॉर्ड्स भी जीते हैं। विशाल भले ही सक्सेसफुल हैं, लेकिन एक वक्त था, जब उनकी जिंदगी कुछ और ही थी। उत्तर प्रदेश के बिजनौर के चांदपुर शहर में जन्में विशाल क्रिकेट की दुनिया में कारनामा करना चाहते थे, लेकिन वक्त और हालात ने ऐसी किस्मत पलटी कि सबकुछ बदल गया। फिर भी विशाल ने हिम्मत नहीं हारी और बॉलीवुड की दुनिया में खूब नाम कमाया। आज (4 अगस्त) वो अपना 57वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। आइये इस खास मौके पर उनके बारे में जानते हैं कुछ अनसुनी बातें।

Vishal Bhardwaj का जन्म 4 अगस्त 1965 को चांदपुर शहर, बिजनौर जिला, यूपी में हुआ था। उनकी मां सत्या भारद्वाज हाउसवाइफ थीं और पिता राम भारद्वाज शुगरकेन (गन्ना) इंस्पेक्टर। वो हिंदी फिल्मों के लिए कविताएं और लिरिक्स भी लिखते थे। जब विशाल पांचवी क्लास में थे, तब तक उनका परिवार नजीबाबाद में रहता था। इसके बाद वे मेरठ शिफ्ट हो गए।

पिता की मौत के बाद नहीं बन पाए क्रिकेटर!

मेरठ में विशाल भारद्वाज स्टेट अंडर-19 टीम के लिए क्रिकेट खेलते थे। जिस साल वो इंटर-यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले थे, उसी साल प्रैक्टिस मैच के दौरान उनका अंगूठा टूट गया। इस कारण वो उस साल खेल नहीं पाए। इसी साल जिंदगी ने उन्हें एक और बड़ा सदमा दिया। उनके पिता का देहांत हो गया। इस कारण वो क्रिकेट में आगे अपना सफर नहीं बढ़ा पाए।

भाई की भी हार्ट अटैक से चली गई जान

विशाल की जिंदगी में अभी और भी गम बाकी थे। उनके बड़े भाई जो फिल्म प्रोड्यूसर बनने के लिए मुंबई में कई साल से स्ट्रगल कर रहे थे, उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई।

17 साल की उम्र में बनाया गाना

विशाल जब 17 साल के थे, तब उन्होंने एक गाना कंपोज किया था। जिसे सुनने के बाद उनके पिता ने म्यूजिक डायरेक्टर उषा खन्ना के साथ डिस्कस किया था। उन्होंने साल 1985 में उसे 'यार कसम' फिल्म में इस्तेमाल किया।

रेखा से हुई मुलाकात

फिर विशाल दिल्ली चले गए। जहां कॉलेज के एनुअल फंक्शन में उनकी मुलाकात रेखा भारद्वाज से हुई। वो उनसे सीनियर थीं, लेकिन दोनों को मोहब्बत हुई और बाद में दोनों ने शादी कर ली थी। ये बात आप शायद ही जानते होंगे कि विशाल टेनिस प्लेयर भी हैं।

मिली पहली जॉब

विशाल ने उन दोस्तों के लिए हारमोनियम बजाना शुरू कर दिया, जो गजल सिंगर्स थे। कुछ साल बाद उन्हें पहली जॉब मिली। दिल्ली की एक म्यूजिक कंपनी में। इसके बाद वो म्यूजिक कंपोजर बनने के लिए मुंबई चले गए। लेकिन वो म्यूजिक कंपोज करने का मौका पाने के लिए फिल्मों के डायरेक्शन में चले गए। उन्हें Pulp Fiction और Dekalog देखने के बाद डायरेक्शन में हाथ आजमाने की कुलबुलाहट हुई। साल 1995 में 'अभय' में म्यूजिक कंपोज करने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और उनका कारवां आगे बढ़ता चला गया।

बनाई ये फिल्में

विशाल ने 'मकड़ी', 'मकबूल', 'ओमकारा', 'हैदर', '7 खून माफ', 'कमीने' और 'मटरू की बिजली का मंडोला' जैसी कई फिल्में बनाई हैं। उन्होंने कई फिल्में भी प्रोड्यूस की हैं।

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