विधु विनोद चोपड़ा ऑस्कर में हुए थे नॉमिनेट, वीज़ा ऑफिस से उन्हें भगाने लगे स्टाफ

विधु विनोद चोपड़ा ऑस्कर में हुए थे नॉमिनेट, वीज़ा ऑफिस से उन्हें भगाने लगे स्टाफ
'3 इडियट्स', 'लगे रहो मुन्ना भाई', 'मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'मिशन कश्मीर' जैसी कई शानदार फिल्मों के लिए फेमस प्रड्यूसर और डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा का आज 5 सितम्बर को जन्मदिन है। विधु विनोद चोपड़ा अपना 70वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं। श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में जन्मे और पले-बढ़े विधु विनोद चोपड़ा ने 'परिंदा' और '1942: अ लव स्टोरी' जैसी कई शानदार फिल्मों का निर्देशन किया है, जबकि '3 इडियट्स', 'लगे रहो मुन्ना भाई', 'मुन्ना भाई एमबीबीएस', 'पीके' जैसी फिल्में उन्होंने प्रॉड्यूस किया। विधु विनोद चोपड़ा टेलिविजन इंडस्ट्री में 'रामायण' जैसे धार्मिक शोज़ बनाने वाले फेमस डायरेक्टर रामानंद सागर के सौतेले भाई भी हैं। आज विधु विनोद चोपड़ा के जन्मदिन पर सुना रहे हैं उनकी फिल्म को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट होने के बाद का किस्सा, जो बहुत ही मजेदार है।

विधु विनोद चोपड़ा की पर्सनल लाइफ के बारे में ये बातें हो सकता है काफी कम लोगों को पता हो। जी हां, रामानंद सागर और विधु विनोद चोपड़ा आपस में सौतेले भाई हैं। रामानंद सागर के पिता की पहली वाइफ का निधन हो गया। इस शादी से उन्हें बेटा रामानंद सागर हुए। इसके बाद उन्होंने दूसरी शादी की और विधु विनोद चोपड़ा का जन्म हुआ। रामानंद सागर और विधु विनोद चोपड़ा के बीच 35 साल की उम्र का अंतर था। ये लगभग उतना ही है जितना आमतया एक पिता और बेटे के बीच होता है। शायद यही वजह है कि रामानंद सागर भी विधु विनोद चोपड़ा को अपने बेटे की तरह ही मानते थे।

दूसरी फिल्म 1978 में आई और उन्हें ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया

विधु विनोद चोपड़ा ने 1976 से 'मर्डर एट मंकी हिल' से बॉलीवुड में एंट्री मारी। ये एक डिप्लोमा फिल्म थी जिसके लिए बेस्ट एक्सपेरिमेंटल फिल्म का नैशनल फिल्म अवॉर्ड उन्हें दिया गया। इसके बाद उनकी दूसरी फिल्म 1978 में आई, जिसका नाम था 'एन एन्काउंटर विद फेसेस', जो एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म थी। अपनी दूसरी ही फिल्म के लिए Vidhu Vinod Chopra को शॉर्ट सब्जेक्ट में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री के लिए ऑस्कर के लिए नॉमिनेट किया गया था। हालांकि, ऑस्कर के लिए वह नॉमिनेट तो हो गए लेकिन इस अवॉर्ड समारोह में जाने के लिए उन्हें कितना पापड़ बेलना पड़ा था इसका किस्सा काफी फनी भी है और हैरान करने वाला भी।

छोटे से जगह पर छपी थी ये खबर

विधु ने अपनी इस फिल्म को ऑस्कर के लिए नॉमिनेट होने के बाद की कहानी 'द लल्लन टॉप' को सुनाई। इसी बातचीत में उन्होंने बताया, 'किसी ने मुझे फोन किया तो मैंने उनको कहा कि भैया ऑस्कर बहुत बड़ी चीज होती है, कहां नॉमिनेट हो गए तो उस शख्स ने बताया कि अखबार में छपा है। फिल्ममेकर ने बताया कि किताब में चौथे-पांचवें पेज पर बिल्कुल छोटे से जगह पर लिखा था। आज के डेट में अगर ऐसा हो तो सोचिए क्या होगा। लेकिन उस वक्त कुछ नहीं हुआ, हमको तो किसी ने पूछा ही नहीं।'

विधु विनोद चोपड़ा के पास न वीज़ा-पासपोर्ट था और न पैसे

उन्होंने कहा कि तब समझ नहीं आया कि नॉमिनेट होने के बाद कहां जाएं तो पहले वो फिल्म डिविजन गए और पूछा- ये सच्ची खबर है? तो उन्होंने कहा- हां और आपको इन्वाइट किया है अकैडमी ने। उन्होंने पूछा- तो कैसे जाएंगे तो जवाब मिला कि वो तो आपको जाना पड़ेगा। वो सीधा दिल्ली रवाना हुए। सोमवार को ऑस्कर था और शुक्रवार को उन्हें ये सब पता लगा था। उन्होंने बताया कि उनके पास न वीज़ा था, न पासपोर्ट और न पैसे थे। इसके बाद विनोद लालकृष्ण आडवाणी से मिले और बिना पुलिस वेरिफिकेशन के एक दिन में उन्हें पासपोर्ट मिल गया जो 6 महीने के लिए वैलिड था।


सरकार की तरफ से मिला 20 डॉलर का भत्ता

उन्होंने फिल्ममेकर को एयर इंडिया की टिकट मिली और सरकार की तरफ से 20 डॉलर का भत्ता मिला एक हफ्ते के लिए। इसे लेकर वो भागते हुए मुंबई पहुंचे और शनिवार सुबह ब्रीच कैंडी पहुंचे वीज़ा के लिए। उस दिन अमेरिकन ऐंबेसी बंद था और फिर वहां मौजूद चौकीदार से भिड़ गए।

ऑफिसर ने पुलिस को बुलाने की दी धमकी

उन्होंने बिल्डिंग के बाहर खड़े चौकीदार से कहा- मुझे वीजा चाहिए तो उसने इंग्लिश में कहा- आप चले जाइए, शनिवार को बंद रहता है। विधु ने बताया कि वो इंग्लिश में बोलता जा रहा था फिर मैंने उसको मोटी-मोटी गालियां देनी शुरू की कि यार तू हिन्दुस्तानी है, तू हिन्दी में बात कर। उन्होंने कहा, 'तब तक एक अंग्रेज अंदर से आया और कहा- अगर आप यहां से हीं निकलते हैं तो हम पुलिस को बुला लेंगे। मैंने कहा- आपको पता है, ऑस्कर सोमवार को है। तो वो मुझे देखकर कहता है कि आपको ऑस्कर का क्या करना है? मैंने कहा- मैं नॉमिनेटेड हूं।'

'मैं हूं विधु विनोद चोपड़ा, मैं नॉमिनेट हुआ हूं वो सुनकर शॉक्ड था'

फिल्ममेकर ने कहा, 'उसे लगा होगा ये कोई पागल है, मैं ऐसी थर्ड क्लास हालत में था। मैंने कहा- आपको प्रूफ चाहिए? पेपर निकाला और दिखाया और कहा- मैं हूं विधु विनोद चोपड़ा, मैं नॉमिनेट हुआ हूं। वो शॉक्ड था और वो मेरा पासपोर्ट लेकर गया अंदर और 15 मिनट आधे घंटे में आया और उसमें एक हफ्ते का सिंगल एंट्री वीजा था। मुझे कहता है अगली बार सीन मत क्रिएट करना। मैंने हंसकर कहा- अगर मैंने सीन नहीं क्रिएट किया होता तो आज ऑस्कर नहीं जा पाता। फिर वो भी हंसा और उसने ऑल द बेस्ट कहा।'

Advertisement