भोपाल। पत्रकारिता समाज सेवा है, व्यवसाय नहीं है। आप जनता के हित के लिए हैं, व्यक्ति के हित के लिए नहीं हैं। कुरीतियों को दूर करने में प्रेस का बहुत बड़ा योगदान है। पत्रकारों का काम निष्पक्ष रहकर सटीक तथ्यों के साथ शासन के अंगों को सचेत करना है। स्वतंत्र प्रेस लोकतांत्रिक राष्ट्र की रीढ़ होती है।
प्रेस की ताकत बहुत ज्यादा
यह बात उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को भोपाल में कही। वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के दीक्षा समारोह में भावी पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेस की ताकत बहुत ज्यादा है, बस समझने की आवश्यकता है। पत्रकारिता की वर्तमान दशा और दिशा गहन चिंता का विषय है। इनकी कमियों का निदान होना चाहिए।
भावी पत्रकारों को दिया मार्गदर्शन
भावी पत्रकारों से उन्होंने कहा कि आप न्यायपालिका, कार्यपालिका व विधायिका को अपनी ताकत से सजग और कठघरे में रख सकते हैं। समाचारों में सकारात्मकता को महत्व देना होगा। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने दीक्षा समारोह में 23 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। उनकी पत्नी डा. सुदेश धनखड़ ने नवीन परिसर में कदंब के पौधे रोपे।
राजनीतिक चश्मे से नहीं देखें विकास यात्रा को
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में विकास की यात्रा को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखें। बीते दो दशक में मध्य प्रदेश ने कई मुकाम हासिल किए हैं। सिंचाई सुविधाओं, बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आपके राज्य में कितना बदलाव आया और पत्रकारिता जगत ने क्यों नहीं दिखाया, यह समझ से परे है।
नवीन परिसर माखनपुरम का लोकार्पण
यहां सबसे पहले उपराष्ट्रपति ने नवीन परिसर माखनपुरम का लोकार्पण किया। दीक्षा समारोह में जून, 2018 से दिसंबर, 2022 तक के 443 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें से उपराष्ट्रपति ने 20 विद्यार्थियों को पीएचडी और तीन विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। कार्यक्रम में जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल, उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव, भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कुलपति प्रो. केजी सुरेश और कुलसचिव अविनाश वाजपेयी उपस्थित रहे।
भारत का अच्छा देख कुछ लोगों का हाजमा खराब हो जाता है
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि देश बहुत आगे बढ़ रहा है। यहां कल्पना से परे काम हो रहा है। हमारी उपलब्धियों पर दुनिया नाज कर रही है। दुनिया कह रही है कि यदि आर्थिक जगत के लिए कहीं रोशनी है तो वो जगह भारत है पर जब भारत में कुछ अच्छा होता है तो कई लोगों का हाजमा खराब हो जाता है। वे मौका देखते हैं भारत और हमारी संस्थाओं को कलंकित करने के लिए और फिर दुनिया में फेरा लगाते हैं। अभिव्यक्ति की जितनी स्वतंत्रता भारत में है, किसी और देश में नहीं है।
भारत से भ्रष्टाचार खत्म हो रहा है
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि अभी हाल ही में जी-20 सम्मेलन हुआ। इसमें मुझे दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों से मिलने का मौका मिला। उसमें कुछ बातें ऐसी सामने आईं, जिन्हें पत्रकारों को सामने रखना चाहिए। भारत ने वित्तीय क्षेत्र में जो किया है वह 47 साल में भी संभव नहीं था। यदि हम ये देखें कि भ्रष्टाचार कैसे खत्म हुआ। पैसा सीधे बैंक खाते में जाने लगा। दुनिया के मापदंड पर डायरेक्ट डिजिटल ट्रांजेक्शन 45 प्रतिशत से ज्यादा है। हमने ये प्रगति हासिल की है।
1980 के दौर में होती थी खोजी पत्रकारिता
उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि हमारे पत्रकार प्रतिभाशाली हैं। 1980 के दौर में खोजी पत्रकारिता होती थी। अब वह खत्म हो गई है। पत्रकार यदि विकास को अपने रडार पर रखेगा तो समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने कई चैनलों पर होने वाली बहस में अनैतिक भाषा के उपयोग पर चिंता भी जताई। संस्थान के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने स्वागत उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम में प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव, सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और संस्थान के कुलपति केजी सुरेश भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्याथियों समेत सभी लोग पारंपरिक भारतीय परिधान में पहुंचे। पुरुष विद्यार्थी जहां कुर्ता-पायजामा और सिर पर साफा पहने हैं। वहीं महिला विद्यार्थी साड़ी और साफे में नजर आई। समारोह में धारण किए जाने वाले अंग वस्त्र केरल से मंगाए गए ।
उपराष्ट्रपति ने ड्रेस कोड की सराहना की
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि इस विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षा समारोह के अवसर मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि दीक्षा समारोह में तीनों मेडल बालिकाओं ने हासिल किए हैं। जो मैंने दुनिया और देश में नहीं देखा, उसे देखकर अभिभूत हूं। यहां विद्यार्थियों के पारंपरिक विधान अंग वस्त्र देख मुझे बहुत खुशी हो रही है। मुझे उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम चारों दिशाओं की झलक यहां दिख रही है। आपके इस ड्रेस कोड को सदा याद रखूंगा।
विद्यार्थियों ने ली शपथ
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को दीक्षा दी गई। इसमें विद्यार्थियों को शपथ दिलाई गई कि आपको गौरव मिले, जिनसे आपकी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़े और समस्त मानवता का कल्याण हो। देश के प्रति आपका नैतिक दायित्व है। राष्ट्र के सुख दुख को अपना सुख-दुख समझें अपने चरित्र और बुद्धि के विकास से राष्ट्र को समृद्ध और सुखी बनाएं कि आपकी शिक्षा आपको तेज प्रदान करें और शुभ प्रेरणाय जीवन के विकट संघर्षों में भी आपकी मानवता और विश्वास अटल रहे।
400 से ज्यादा विद्यार्थियों को उपाधि
नवीन परिसर का लोकार्पण
दीक्षा कार्यक्रम से पहले एमसीयू परिसर में पहुंचकर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संस्थान के नवीन परिसर माखनपुरम का लोकार्पण किया। बिशनखेड़ी के पास 50 एकड़ में विश्वविद्यालय का माखनपुरम परिसर बसा हुआ है, जिसमें दो अकादमिक भवन तक्षशिला एवं विक्रमशिला हैं। विश्वविद्यालय के चार-चार मंजिला भव्य इन दो ब्लाक में कुल 10 विभाग संचालित होते हैं। इस साल विश्वविद्यालय द्वारा सिनेमा अध्ययन विभाग शुरू किया गया है। यहां भारतीय भाषा विभाग की भी स्थापना की गई है।











