सीएएफ की अपील समिति ने कहा कि सेनेगल का मैदान छोड़ना टूर्नामेंट नियमों के आर्टिकल 82 और 84 का उल्लंघन है। इन नियमों के तहत बिना अनुमति मैच छोड़ने वाली टीम को हार मान लिया जाता है। इसी आधार पर मैच का परिणाम बदलते हुए मोरक्को को 3-0 से विजेता घोषित किया गया।
फाइनल में स्टॉपेट टाइम में हुआ था जमकर विवाद
18 जनवरी को रबात में खेले गए फाइनल के दौरान स्टॉपेज टाइम में भारी विवाद हुआ। सेनेगल ने एक गोल किया, लेकिन रेफरी जीन-जैक्स नडाला ने मोरक्को के बॉक्स में फाउल बताते हुए गोल को रद्द कर दिया। इसके तुरंत बाद मोरक्को को पेनल्टी मिली, जब ब्राहिम डियाज को फाउल किया गया। इस फैसले से नाराज होकर सेनेगल के कोच पेप बौना थियाव ने अपनी टीम को मैदान से बाहर बुला लिया। करीब 20 मिनट बाद कप्तान सादियो माने के समझाने पर टीम वापस लौटी। हालांकि, तनाव बना रहा। पेनल्टी पर डियाज गोल नहीं कर सके, जिसे एडौर्ड मेंडी ने बचा लिया। इसके बाद पापा गुये ने 94वें मिनट में गोल कर सेनेगल को जीत दिलाई थी।सेनेगल फुटबॉल फेडरेशन ने किया विरोध
इस फैसले पर सेनेगल फुटबॉल फेडरेशन ने कड़ा विरोध जताया है। फेडरेशन के सचिव जनरल अब्दुलाये सेदौ सो ने इसे मजाक बताते हुए कहा कि फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है। सेनेगल इस मामले को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (सीएएस) में ले जाएगा और आखिरी फैसले तक लड़ाई जारी रखेगा।इस फैसले से मोरक्को ने 50 साल बाद जीता अफ्रीकन कप ऑफ नेशंस का खिताब
इस फैसले के साथ मोरक्को ने 50 साल बाद अपना दूसरा अफ्रीकन कप ऑफ नेशंस खिताब जीत लिया। रॉयल मोरक्कन फुटबॉल फेडरेशन ने सीएएफ के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्रतियोगिता के नियमों और स्थिरता को मजबूती मिलेगी। सीएएफ ने मोरक्को के इस्माइल सैबारी पर लगाया गया 100,000 डॉलर का जुर्माना हटा दिया और उनका निलंबन तीन मैच से घटाकर एक मैच कर दिया।हालांकि वीएआर प्रक्रिया में हस्तक्षेप के लिए कुछ खिलाड़ियों और अधिकारियों पर जुर्माना बरकरार रखा गया है। यह विवाद अब सिर्फ एक मैच के नतीजे से आगे बढ़कर अफ्रीकी फुटबॉल की साख और नियमों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। सीएएस इस मामले पर अब अंतिम निर्णय लेगी।











