UPI Fee: 15000 करोड़ कमाई के चक्कर में मोदी सरकार! पुनर्विचार न करने पर अड़ी, चिदंबरम ने भी किया था सपोर्ट

UPI Fee: 15000 करोड़ कमाई के चक्कर में मोदी सरकार! पुनर्विचार न करने पर अड़ी, चिदंबरम ने भी किया था सपोर्ट
नई दिल्ली: देश में नकद मुक्त बनाने की दिशा में बने पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) कई सालों से मुफ्त रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव किया जा रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को साफ-साफ कहा कि पर्सन-टू-मर्चेंट UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर कोई पुनर्विचार नहीं किया जाएगा। छोटे रिटेलर्स, पेट्रोलियम डीलर्स और ब्रोकर्स ने इस फीस को हटाने की मांग की थी, उनका तर्क था कि इससे उनके मार्जिन पर असर पड़ेगा। 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% का नया MDR यह तय कर सकता है कि भारत के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डिजिटल पेमेंट सिस्टम का खर्च आखिरकार कौन उठाएगा।

वहीं, बुधवार को फाइनेंस पर संसदीय पैनल की बैठक में UPI ट्रांज़ैक्शन पर चार्ज का मुद्दा उठा। पैनल ने मार्च में अपनी रिपोर्ट में जोर दिया था कि सरकारी खजाने पर बोझ डाले बिना UPI इकोसिस्टम की फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी (वित्तीय स्थिरता) बनाए रखने के लिए एक व्यावहारिक रेवेन्यू मैकेनिज्म जरूरी है। इस पैनल में कांग्रेस नेता पी चिदंबरम भी शामिल थे।

15 अक्टूबर से UPI लेनदेन पर MDR से 15,000 करोड़ की कमाई

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 15 अक्टूबर से UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू होने वाला है। इस नए सिस्टम से 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% की लेवी (शुल्क) से लगभग 15,000 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। यह रकम बैंकों, पेमेंट ऐप्स और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच बांटी जाएगी। यह देश के पेमेंट सिस्टम के जरिए UPI पेमेंट मोड पर शुल्क लगाने की दिशा में पहला कदम है। UPI पेमेंट मोड पिछले छह सालों में लगभग कैश के बराबर हो गया है। UPI सिस्टम 2020 में शुरू किया गया था।
5 अक्टूबर से UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू होने वाला है। इस नए सिस्टम से 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% की लेवी (शुल्क) से लगभग 15,000 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट

अरसे से बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां कर रही मांग

  • पेमेंट सिस्टम से जुड़े बैंक और दूसरी फाइनेंशियल कंपनियां लंबे समय से MDR चार्ज को फिर से लागू करने की मांग कर रही हैं, क्योंकि पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने में लागत आती है।
  • सरकार 'RuPay डेबिट कार्ड और कम-वैल्यू वाले BHIM-UPI ट्रांज़ैक्शन (P2M) को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव स्कीम' के तहत छोटे मर्चेंट्स को 2,000 रुपये तक के पेमेंट पर सब्सिडी दे रही है।
  • 50 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए इंसेंटिव की सीमा ट्रांज़ैक्शन वैल्यू का 0.15% तय की गई है। सरकार ने FY22 से FY25 के बीच इस इंसेंटिव स्कीम के तहत कुल 8,730 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

मंगलवार को जारी फ्रेमवर्क के अनुसार, अगर कोई ग्राहक किसी मर्चेंट को 2,000 रुपये से ज़्यादा का पेमेंट करता है, तो उस पर 0.4% की एक समान दर से MDR लगाया जाएगा (कुछ अपवादों को छोड़कर)। वित्त मंत्रालय ने कहा कि UPI एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को साफ तौर पर प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने से मना किया गया है। सरकार ने बैंकों को सलाह दी है कि वे यह पक्का करें कि मर्चेंट MDR चार्ज का बोझ ग्राहकों पर न डालें।
रिपोर्ट

बिना किसी खर्च वाली पब्लिक सर्विस

  • फीस की आलोचना करने वालों का कहना है कि UPI भारत की सबसे बड़ी डिजिटल उपलब्धियों में से एक है और इसे बिना किसी खर्च वाली पब्लिक सर्विस (public good) के तौर पर ही रहना चाहिए। उनका मानना ​​है कि इससे डिजिटल बदलाव की रफ्तार धीमी हो सकती है और लोग फिर से कैश वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ सकते हैं।
  • NPCI के बदले हुए MDR फ्रेमवर्क से एक और बड़ी चिंता पैदा होती है। चूंकि UPI ट्रांज़ैक्शन पर MDR लगाने से रोकने वाले कानून में अब बदलाव कर दिया गया है, इसलिए सरकार नोटिफिकेशन के जरिए UPI और RuPay डेबिट-कार्ड ट्रांजैक्शन की और भी कैटेगरी पर चार्ज लगा सकती है और इसके लिए उसे संसद जाने की भी जरूरत नहीं होगी।

पैनल की रिपोर्ट में UPI रेवेन्यू मॉडल का समर्थन

फाइनेंस मिनिस्ट्री के टॉप अधिकारियों (DEA सेक्रेटरी और CEA सहित) ने बुधवार को BJP सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली फाइनेंस पर संसदीय कमेटी के साथ VDA (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
यह पूरी तरह से जन-विरोधी फैसला है। हर दिन लाखों ऐसे ट्रांज़ैक्शन होते हैं और फीस लगाने का फैसला एकतरफा था।
प्रेमाचंद्रन

पैनल की बैठक के दौरान, RSP के विपक्षी सांसद NK प्रेमाचंद्रन ने कहा कि UPI पर चार्ज लगाने के सरकार के फैसले पर चर्चा होनी चाहिए, जबकि कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने GDP कैलकुलेशन का मुद्दा उठाया। लेकिन पैनल के चेयरमैन ने कहा कि ये दोनों मुद्दे बैठक के एजेंडे का हिस्सा नहीं हैं।


UPI ​​और इस बात को लेकर कि ट्रांज़ैक्शन चार्ज लगाए जाने वाले हैं, पूरे देश में चिंता और आक्रोश है। इसलिए जाहिर है, जो बात देश के लोगों को परेशान करती है, वह संसदीय कमेटी की कार्यवाही में भी झलकती है और उठाई जाती है।
मनीष तिवारी, कांग्रेस

चिदंबरम भी पैनल के सदस्य थे

  • इसी साल मार्च में आई अपनी रिपोर्ट में संसदीय पैनल ने कहा था कि 'UPI इकोसिस्टम की फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यावहारिक रेवेन्यू मैकेनिज्म बनाना जरूरी है, ताकि सरकारी खजाने पर लगातार बोझ न पड़े।'
  • पैनल में मनीष तिवारी, प्रेमाचंद्रन और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी सदस्य थे। उसी रिपोर्ट में पैनल ने यह भी सुझाव दिया था कि सरकार एक टियर वाला, आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल विकसित करे।
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