उमंग सिंघार ने आगे कहा कि सिर्फ घोषणा ही समाधान नहीं है, सरकार इन बिंदुओं पर जवाब दे:-
* जिन 3.5 लाख वनाधिकार पट्टों को आपने निरस्त किया, क्या उनका दोबारा सर्वे होगा?
* जो 1.25 लाख नए आवेदन आए हैं, क्या उन्हें भी इस सर्वे में शामिल किया जाएगा?
* सरकार सर्वे कब तक कराएगी? क्या इसकी कोई समय-सीमा तय की गई है?
* सर्वे के लिए कमेटी का गठन कब होगा? कौन ज़िम्मेदार होगा, और कब तक टीम गांवों में पहुंचेगी?
श्री सिंघार ने कहा यह सिर्फ़ एक खाली घोषणा लग रही है। जिससे प्रदेश के आदिवासियों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला। सरकार को इन सवालों का तत्काल और स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कौन काट रहा है जंगल, इसकी इसकी जांच हो:
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कौन काट रहा है आदिवासियों के जंगल? सरकार इस पर जांच कराए। उन्होंने सरकार से पूछा कि आख़िर ऐसा क्या कारण है कि पिछले दो-तीन वर्षों में कई इलाकों में जंगल तेजी से साफ हो रहे हैं? क्या इसमें वन विभाग की मिलीभगत है? बार-बार आदिवासियों पर आरोप लगाया जाता है कि वो जंगल काट रहे हैं - लेकिन सच्चाई क्या है? श्री उमंग सिंघार ने अंत में कहा कि सरकार को इस पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि जंगल बचें और आदिवासियों को बदनाम करने की साज़िश भी सामने आ सके।
* जिन 3.5 लाख वनाधिकार पट्टों को आपने निरस्त किया, क्या उनका दोबारा सर्वे होगा?
* जो 1.25 लाख नए आवेदन आए हैं, क्या उन्हें भी इस सर्वे में शामिल किया जाएगा?
* सरकार सर्वे कब तक कराएगी? क्या इसकी कोई समय-सीमा तय की गई है?
* सर्वे के लिए कमेटी का गठन कब होगा? कौन ज़िम्मेदार होगा, और कब तक टीम गांवों में पहुंचेगी?
श्री सिंघार ने कहा यह सिर्फ़ एक खाली घोषणा लग रही है। जिससे प्रदेश के आदिवासियों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला। सरकार को इन सवालों का तत्काल और स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कौन काट रहा है जंगल, इसकी इसकी जांच हो:
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कौन काट रहा है आदिवासियों के जंगल? सरकार इस पर जांच कराए। उन्होंने सरकार से पूछा कि आख़िर ऐसा क्या कारण है कि पिछले दो-तीन वर्षों में कई इलाकों में जंगल तेजी से साफ हो रहे हैं? क्या इसमें वन विभाग की मिलीभगत है? बार-बार आदिवासियों पर आरोप लगाया जाता है कि वो जंगल काट रहे हैं - लेकिन सच्चाई क्या है? श्री उमंग सिंघार ने अंत में कहा कि सरकार को इस पूरे मामले की तत्काल निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, ताकि जंगल बचें और आदिवासियों को बदनाम करने की साज़िश भी सामने आ सके।
गौरतलब है कि आदिवासियों के पट्टों और अधिकारों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नेपानगर में एक बड़ी रैली की थी और सरकार को 15 दिन में मामलों का निराकरण ना होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके अलावा देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को पत्र भी लिखा था, जिसके बाद सरकार झुकी और उन्हें आदिवासियों को लेकर एक कदम आगे बढ़ाना पड़ा है।











