कटी फटी जींस का चलन, मानसिक कमी मानसिक विकृति या मानसिक गुलामी

कटी फटी जींस का चलन, मानसिक कमी मानसिक विकृति या मानसिक गुलामी
पहले के जमाने में हिप्पी लोग ऐसे फटे टूटे कपड़े पहनते थे जिस पर ठिगले लगे रहते थे और यह लोग इधर-उधार चोरी करके अपने नशा और पेट पालते थे। यह एक कौम एसी थी जो अलग थलग रहती थी। लेकिन अब यदि एक सेलिब्रिटी ने फटी जींस पहन ली तो पूरे विश्व की युवा पीढ़ी उसकी नकल करते हुए फटी जींस पहनना शुरू कर देती है। आप सोचे *आपके जन्मदिन या आपकी शादी में आपको यदि फटे हुए कपड़े उपहार में मिले तो आपको कैसा लगेगा* तब आप चिड जाएंगे, आप कितने मानसिक गुलाम हैं इस बात पर विचार करें अपने विवेक का उपयोग न करते हुए सेलिब्रिटी की नकल में फटे कपड़े पहनना कहां की समझदारी है और इतना ही नहीं कुछ व्यापार करने वाले इतने समझदार हैं कि पुराने जींस को भी कटे फिटे मैं बदलकर महंगे दाम पर मॉल में बेचते हैं।
उट पटांग फैशन करके युवा पीढी अपने आप में मानसिक बीमार होते जा रही है।
 *भारतीय संस्कृति, परंपरा, रूढी, परिवार कि मान्यता पर युवा पीढ़ी ने चलना चाहिए, पाश्चात्य संस्कृति से दूर रहना चाहिए।* 
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)
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