भोपाल के करीब नेशनल हाईवे पर टोल चोरी का खेल... गांवों के बीच से बनाया हादसों का रास्ता

भोपाल के करीब नेशनल हाईवे पर टोल चोरी का खेल... गांवों के बीच से बनाया हादसों का रास्ता

भोपाल। राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा से बचकर गांवों के तंग रास्तों पर धड़ल्ले से टोल चोरी का जानलेवा खेल खेला जा रहा है। नर्मदापुरम रोड से भोपाल और रायसेन जाने वाले डंपर अब टोल चोरी के लिए 15 गांवों से होकर गुजरने वाले शार्टकट रूट को अपना रहे हैं, जिससे न सिर्फ शासन को रोजाना हजारों का चूना लगाया जा रहा है, बल्कि उन सड़कों पर आवाजाही करने वाले हजारों ग्रामीणों की जान को भी जोखिम में बनी है।

गांवों की संकरी और कमजोर सड़कों पर डंपरों की बेलगाम रफ्तार लगभग हर सप्ताह एक सड़क हादसे का कारण बनती है और कई बार डंपर की चपेट में लोगों की मौत हो जाती है। टोल चोरी रूट के एक क्षेत्र में ही बीते एक साल में डंपर 21 सड़क हादसों का कारण बने हैं, जिसमें छह लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। टोल चोरी के चंद रुपयों के लिए दांव पर लगती ग्रामीणों की जान परिवहन, प्रशासन और पुलिस विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर कर रही है।

शार्टकट से शासन को हर महीने 56 लाख का नुकसान

टोल टैक्स चोरी के लिए डंपरों के शार्टकट रूट से शासन को हर महीने कम से कम 56 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है। नवदुनिया की टीम ने जब तीन दिन तक लगातार गांवों का दौरा किया तो पाया कि हर दिन गांवों के रास्तों से 100 से अधिक डंपर गुजरते हैं।

ये डंपर नर्मदापुरम रोड स्थित विशनखेड़ा टोल प्लाजा और 11 मील टोल प्लाजा को बायपास करते हुए गांवों के रास्तों से आवाजाही करते हैं। एक टोल पर दस पहिया डंपर का टोल 470 रुपये लगता है, वापसी पर भी उतना है चार्ज होता है, जो मिलकर 940 रुपये होता है।

वहीं, दो टोल पर टैक्स की राशि 1880 रुपये हो जाती है। इस प्रकार कम से कम 100 डंपरों की आवाजाही पर रोजाना टोल चोरी से करीब एक लाख 88 हजार रुपये और यही राशि महीने भर में 56 लाख 40 हजार रुपये हो जाती है।

इस रूट से वाहन जाते 
हैं भोपाल हाईवे पर

औबेदुल्लागंज स्थित एमपीटी मिड-वे ट्रीट के सामने से होकर डंपर गौहरगंज-भोजपुर मार्ग की ओर सनोती गांव से होते हुए मगरपुंछ, आंखखेड़ी, खसरोद, जमुनिया बाजयाफ्त, नीमखेड़ा, कीरतनगर, मेंदुआ, पिपलिया और रापड़िया गांव के पास से होते हुए मार्ग से भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर पहुंचते हैं।

सामान्य रूट से तीन किमी दूरी अधिक

औबेदुल्लागंज से रापड़िया मोड़ के टोल चोरी रूट की दूरी गांवों से होकर जाने पर करीब 25 किलोमीटर होती है, जबकि मुख्य मार्ग से जाने पर 22 किलोमीटर है।

रायसेन रोड पर जाने 
के लिए है यह रूट

औबेदुल्लागंज से रायसेन रूट के लिए भी भोपाल जाने वाले मार्ग को डंपर चालक अपनाते हैं। वे भोजपुर जोड़ से चिकलोद रोड की ओर मुड़ जाते हैं। वहां से बंगरसिया फिर मुड़कर उमरावगंज-गुड़ावल रोड पर घाटखेड़ी, हमीदखेड़ी, उमरावगंज, गुड़ावल, मुनीरगढ़ और फिर बिलखिरिया कलां के रास्ते रायसेन रोड राष्ट्रीय राजमार्ग 146 पर पहुंचते हैं।

सामान्य रूट से 12 किमी दूरी कम

औबेदुल्लागंज से बिलखरिया कलां जाने पर मुख्य मार्ग से दूरी करीब 40 किमी है, वहीं टोल चोरी का शार्टकट से डंपर चालकों को महज 28 किमी में बिलखिरिया कलां मार्ग का रास्ता तय कर लेते हैं।

नो एंट्री टाइम जोन में भी मौत बनकर दौड़ते हैं डंपर

आमजन की सुरक्षा के लिए शहर की सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही के लिए सुबह आठ से रात 11 बजे तक नो एंट्री टाइम जोन निर्धारित किया गया है, लेकिन नगरनिगम क्षेत्र अंतर्गत इन गांवों में रोजाना दिन-रात सैकड़ों डंपर चलते हैं। जिससे हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं, वहीं इनकी लगाम लगाने की कोई तैयारी नहीं की गई है।


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