पहली लैब श्रृंखला
आयुर्वेदिक दवाओं पर शोधकार्य के लिए इस तरह की पहली लैब श्रृंखला तैयार की जा रही है। कालेज प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने एनिमल हाउस की स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इसके बाद चूहों पर दवाओं के प्रयोग को देखा जाएगा। इससे अलग-अलग कैंसर में अलग-अलग औषधियों के प्रभाव की जांच हो सकेगी।
दवा के अलावा घी व शहद की भी जांच
सेंट्रल रिसर्च लैब के सह प्रभारी डा. नितिन उज्जालिया के अनुसार इस लैब में किस औषधीय पौधे का किस रोग पर किस तरह से असर होता है इसकी जांच संभव होगी। यही नहीं, यहां दवा के अलावा घी व शहद की भी जांच की सुविधा होगी। रिसर्च के साथ औषधी निर्माता कंपनी भी सेंपल टेस्ट करवा सकेंगी।
इन लैब का शुरू हुआ सेटअप
फार्माकोग्नोसी
इसमें औषधीय पौधों की जांच और पहचान की जाएगी, जिससे एक जैसे दिखने वाले पौधों की जांच कर अंतर किया जा सके। साथ ही यह देखा जाएगा कि किस पौधे में क्या औषधीय गुण है। उसका किस बीमारी में उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए एडवांस माइक्रस्कोप लगाए गए हैं। जिसमें पौधों के सेल का प्रशिक्षण किया जाएगा।
फार्मास्युटिकल केमेस्ट्री
औषधीय दवाओं (सीरप, चूर्ण व टेबलेट) में उपलब्ध रासायनिक तत्व की गुणवत्ता को देखा जा सकेगा। बाजार में उपलब्ध दवाएं तय मापदंड के अनुरूप है या नहीं इसकी जांच हो सकेगी।
माइक्रोबायोलाजी
काम्बिनेशन से कुछ दवाएं बनाई जाएं तो उनसे क्या फायदा-नुकसान हो सकता है। साथ ही औषधियों की एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल क्षमता जांची जाएगी, जिससे दवा कितने दिन तक और किस तापमान में सुरक्षित रहती है यह पता चल सकेगा।
इनका कहना है
कालेज में शोध कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। छह में तीन भाग का सेटअप पूर्ण हो चुका है। अब लैब की मदद से आयुर्वेद विधि के फायदों को प्रमाण के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा।
- डा. उमेश शुक्ला, प्रचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कालेज











