संदीप तिवारी ने बताया कि नियमानुसार बीएलओ को घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। मजबूरी में लोगों ने स्वयं बूथ पर जाकर फॉर्म लिए और निर्धारित तिथि के भीतर जमा भी किए, इसके बावजूद उनके नाम मतदाता सूची में नहीं जोड़े गए। अब दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में जनता को बार-बार बूथ के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वार्ड में कई ऐसे लोग हैं जो 20 से 30 वर्षों से निवासरत हैं, फिर भी उनके नाम मतदाता सूची से गायब हैं। इससे आम नागरिकों में आक्रोश और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों से जनता को केवल लाइनों में खड़ा करने का काम किया जा रहा है। नोटबंदी से शुरू हुई परेशानी आधार-पैन लिंक, जीएसटी, वाहन आरसी, केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं तक लगातार जारी है।
संदीप तिवारी ने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार मूलभूत सुविधाएं देने के बजाय विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में हुई त्रुटियों को तुरंत सुधार कर प्रभावित नागरिकों को राहत दी जाए।











