मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में मिला उज्‍जैन के नालों का हजारों गैलन गंदा पानी

मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में मिला उज्‍जैन के नालों का हजारों गैलन गंदा पानी
 उज्जैन। मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में मंगलवार को शहर के नालों का हजारों गैलन गंदा पानी सीधे जा मिला। यह देख श्रद्धालुओं की आस्था आहत हुई। वजह, पानी के उपचार के लिए बिछाई 1600 मिलीमीटर (एमएम) की स्ट्राम वाटर पाइपलाइन में क्षमता से अधिक (लगभग चार हजार एमएम) पानी छोड़ना रही।

नतीजा यह निकला कि पाइपलाइन पानी का दबाव नहीं सह पाई और दो चैंबर के ढक्कन हवा में उड़ गए, सारा गंदा पानी शिप्रा में सीधे मिलने लगा। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। दो माह में ये तीसरी घटना है। इंजीनियरों का कहना है इस समस्या का उपाय एक ही है- नदी किनारे एक अतिरिक्त 1600 एमएम की पाइपलाइन बिछाना। क्योंकि बेगमबाग और आसपास की कालोनियों का पानी भी अब मौजूदा पाइपलाइन में छोड़ा जा रहा है, जबकि पहले आधा पानी रुद्रसागर में भरा जाता था।

मालूम हो कि बेगमबाग और आसपास की कालोनियों का गंदा पानी रुद्रसागर और शिप्रा नदी में सीधे मिलने से रोकने को नगर निगम ने आठ वर्ष पहले 1153 मीटर लंबी 1600 मिली व्यास की भूमिगत पाइपलाइन बिछवाई थी। ये पाइपलाइन हरसिदि्ध पाल से रामघाट के रास्ते सदावल ट्रीटमेंट प्लांट तक बिछाई गई थी।

तब महाकाल महालोक बनाने की योजना नहीं बनी थी। सालभर पहले तक रूद्रसागर में आसपास की कालोनियों का पानी भरा करता था, मगर महाकाल महालोक के लोकार्पण (11 अक्टूबर 2022) से रूद्रसागर में नालों का पानी मिलना रोक दिया गया और पाइपलाइन बिछाकर सारा गंदा पानी रामघाट किनारे बिछाई 1600 एमएम की पाइपलाइन में छुड़वाने को कनेक्शन जोड़ दिया।


सामान्य दिनों में तो पाइपलाइन ने दबाव सह लिया, मगर पानी का प्रेशर बढ़ने पर चैंबर उफनने, चैंबर के ढक्कन खुलने की घटनाएं होती रही। मंगलवार को जो घटना घटी, उसके सहित बीते दो माह में ऐसा तीन बार हुआ। हर बार मरम्मत कर व्यवस्था जमा दी गई, मगर मूल समस्या की जड़ समाप्त करने को योजना तक नहीं बनाई गई।

तेज बरसात के कारण भी बनी स्थिति

पूरे मामले में नगर निगम आयुक्त रोशन कुमार सिंह ने ‘नईदुनिया’ से कहा है कि मंगलवार दोपहर तेज बरसात हुई, जिसके कारण 1600 एमएम की स्ट्राम वाटर पाइपलाइन में क्षमता से अधिक पानी पहुंचा और पाइपलाइन पानी का दबाव नहीं सह पाई। इसी कारण चैंबर के ढक्कन खुले और सारा गंदा पानी शिप्रा में जा मिला। आगे से ऐसा न हो, इसके लिए एक अतिरिक्त स्ट्राम वाटर पाइपलाइन बिछाने की योजना बनाएंगे। फिलहाल मरम्मत के लिए अफसरों को निर्देशित किया है। निर्देशानुसार काम शुरू भी कर दिया गया है।

महीनेभर पहले आयुक्त दे चुके निर्देश

इसी वर्ष 21 मई और 30 जून को भी बेगमबाग क्षेत्र के नालों का गंदा पानी शिप्रा में सीधे जा मिला था। पहली घटना के बाद निगम आयुक्त ने शिप्रा शुद्धिकरण के संबंध में आवश्यक बैठक की थी। निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि मानसून आने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि शिप्रा में कहीं से भी किसी भी स्तर पर गंदा पानी ना मिलने पाए। शिप्रा की ओर जाने वाले तथा आसपास के नाले नालियों की सफाई का विशेष ध्यान रखें। नालों का पानी शिप्रा में मिलने से रोकने को जो प्रबंध आवश्यक हैं, तत्काल करें।

सीवरेज प्रोजेक्ट, इस समस्या का हल नहीं

नगर निगम और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कुछ अधिकारी शिप्रा में नालों का पानी सीधे मिलने की समस्या का हल भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन प्रोजेक्ट को बताते हैं, हालांकि उनकी इस बात से कुछ इंजिनियर इत्तफाक नहीं रखते। उनका साफ तौर पर कहना है कि सीवरेज प्रोजेक्ट, सीवर की समस्या के निदान के लिए है। वर्तमान में सीवर का गंदा पानी भी स्ट्राम वाटर लाइन में मिलता है। आगे से ऐसा नहीं होगा। सीवर का गंदा पानी सीवर लाइन से गुजरकर सुरासा में बनाए 92.5 एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचेगा। हालांकि ये अभी दूर की बात है। क्योंकि दो वर्ष में पूर्ण होने वाला सीवरेज प्रोजेक्ट साढ़े पांच वर्ष बाद भी अधूरा है। दावा इस वर्ष दिसंबर तक प्रोजेक्ट पूर्ण करने का किया जा रहा है पर काम की जो गति से उससे प्रतीत होता है कि ये प्रोजेक्ट अभी लंबा खिंचेगा।

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