ज्योतिषियों के अनुसार यह संयोग ग्रेगोरियन (अंग्रेजी) कैलेंडर, चंद्र पंचांग और अधिवर्ष (लीप ईयर) के गणितीय मेल का परिणाम है। यही वजह है कि कुछ वर्षों के अंतराल पर तारीखों और वार का लगभग वही क्रम दोबारा बन जाता है।
ज्योतिषियों के मुताबिक ऐसे बना यह संयोग...
ज्योतिषाचार्य स्मिता पंडित बताती हैं, सामान्य वर्ष 365 दिन का होता है, इसलिए हर वर्ष किसी भी तारीख का वार एक दिन आगे बढ़ जाता है। वहीं लीप ईयर 366 दिन का होने से वार दो दिन आगे खिसकते हैं। इस कारण कुछ वर्ष बाद कैलेंडर का पैटर्न दोहराया जाता है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर में कई बार 6, 11, 17 या 28 वर्ष के अंतराल पर किसी महीने की तारीखें और वार लगभग उसी क्रम में दोबारा दिखाई दे सकते हैं। 2015 और इस वर्ष सावन के चारों सोमवार का एक तारीख पर पड़ना यही संयोग है।
मराठी-गुजराती समाज का सावन 13 अगस्त से...
महाराष्ट्र और गुजरात सहित अमांत पंचांग का पालन करने वाले समाज में श्रावण मास 13 अगस्त से शुरू होकर 10 सितंबर तक चलेगा। वहां सावन के सोमवार 17, 24, 31 अगस्त और 7 सितंबर को होंगे। इसका कारण यह है कि वहां श्रावण मास की शुरुआत अमावस्या के अगले दिन से मानी जाती है, जबकि उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पूर्णिमा के अगले दिन से सावन आरंभ होता है।











