09 जुलाई को समूचे प्रदेश में होगी हड़ताल, ट्रेड यूनियनों का संयुक्त ऐलान,राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे सफल

09 जुलाई को समूचे प्रदेश में होगी हड़ताल, ट्रेड यूनियनों का संयुक्त ऐलान,राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे सफल
- ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा, मध्यप्रदेश.
- इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, यूटीयूसी, सेवा तथा बैंक, बीमा, बीएसएनएल, राज्य व केन्द्रीय कर्मचारियों का साझा मंच.
- 08 जुलाई को जलेंगी मशालें.
भोपाल :  चार श्रम संहिताओं के विरोध समेत 18 सूत्रीय मांगों को लेकर 09 जुलाई को देश के इतिहास की सबसे बड़ी आम हड़ताल होने जा रही है। इस हड़ताल को देश के करोड़ों किसानों के प्रतिनिधि संगठन- संयुक्त किसान मोर्चे ने भी पूर्ण समर्थन दिया है। इस हड़ताल में देशभर में करोडों मेहनतकश मजदूर और कर्मचारी शामिल होंगे साथ ही प्रदेश में लाखों मजदूर कर्मचारी हड़ताल पर होंगे। प्रदेश की कोयला खदाने व मैंगनीज खदानें, बैंक, बीमा, केन्द्रीय कार्यालय, बीएसएनएल के दफ्तरों, एनएफएल, भेल समेत सार्वजनिक उपक्रम व अनेकों निजी उद्योगों में इस दिन मुकम्मल हड़ताल होगी। कई जिलों में आटो व अन्य सार्वजनिक वाहन चालकों के हड़ताल पर रहने से आवागमन पर भारी असर होगा। प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों पर इस दिन सम्पूर्ण केंद्र बन्द हड़ताल होगी तथा आशा कर्मी भी पूर्ण हड़ताल करेंगे। हम्माल-पल्लेदारों के हड़ताल के चलते प्रदेश की मंडियों व मुख्य बाजारों पर प्रभाव पड़ेगा। मेडीकल रिप्रेजेंटेटिव्ह की मुकम्मल हड़ताल के चलते प्रदेश के दवा बाजारों व चिकित्सकीय केंद्रों पर भारी असर होगा।  

इस हड़ताल की समूचे प्रदेश में व्यापक तैयारी की जा रही है। जगह-जगह संयुक्त सम्मेलन, बैठक, गेट मीटिंग, मोहल्ला मीटिंग आदि अब चरम पर है। ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा की विज्ञप्ति में बताया गया है कि हड़ताल की पूर्वसन्ध्या पर 8 जुलाई को समूचे प्रदेश में मशाल जुलूस/प्रदर्शन किए जाएंगे तथा हड़ताल के दिन 9 जुलाई को प्रदेश भर में हड़ताली जुलूस व सभाएं होंगी तथा मांगों का संयुक्त ज्ञापन जिला व तहसील स्तर पर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा जाएगा। 

इंटक प्रदेशाध्यक्ष श्याम सुंदर यादव, एटक प्रदेश महासचिव एस एस मौर्य, सीटू प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रधान, एचएमएस प्रदेशाध्यक्ष नेम सिंह, एआईयूटीयूसी प्रदेश महासचिव रूपेश जैन, सेवा प्रदेश महासचिव कविता मालवीय, केन्द्रीय कर्मचारी समन्वय समिति के महासचिव यशवंत पुरोहित, म. प्र. बैंक एम्पलॉइज़ एसोसिएशन के महासचिव व्ही के शर्मा, सेंट्रल ज़ोन इंश्योरेंस एम्पलॉइज़ एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत केतकर, बीएसएनएल एम्पलॉइज़ यूनियन के परिमंडल सचिव बी एस रघुवंशी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि केंद्र की भाजपा सरकार 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार काली श्रम संहिताओं को थोप रही है। प्रदेश की मोहन यादव सरकार इन्हे पिछले दरवाजे से लागू करने की कोशिश में है। इसके अलावा प्रदेश की सरकार ने श्रमिकों के वैधानिक अधिकार पर कुठाराघात कर न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत पांच वर्ष में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के बजाय लगभग 10 वर्ष में किया और प्रदेश के लाखों श्रमिक आज भी इन पुनरीक्षित दरों के एरियर्स तक से वंचित है।

विज्ञप्ति के जरिए श्रमिक नेताओं ने बताया कि इस हड़ताल की मांगों में तुरंत चारों श्रम संहिताओं को खत्म करने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, अनुबंध मजदूरों और योजना मजदूरों सहित सभी मजदूरों के लिए 26,000/- रुपये प्रतिमाह का न्यूनतम वेतन, सभी श्रेणियों के कामगारों के लिए न्यूनतम पेंशन 9,000/- रुपये प्रतिमाह और सामाजिक सुरक्षा की मांग शामिल है। साथ ही सभी स्तर पर स्थायी भर्ती करने, आउटसोर्स, निश्चित अवधि का रोजगार, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षु जैसे अस्थायी काम पर रोक लगाने, ठेका कर्मचारियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन, काम करने के अधिकार को मौलिक बनाया मनाने, स्वीकृत पदों को भरने और बेरोजगारों के लिए रोजगार पैदा करने, मनरेगा का विस्तार करने व दरें बढ़ाने तथा शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम लागू करने की भी मांग है। एनपीएस और यूपीएस खत्म कर पुरानी पेंशन योजना बहाल किए जाने, मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कमी किए जाने, खाद्य सुरक्षा की गारंटी देने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाने की मांगे शामिल है।  

विज्ञप्ति में बताया गया कि हड़ताल की मांगों में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सरकारी विभागों का निजीकरण बंद करने, राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को खत्म करने  खनिजों और धातुओं के खनन पर मौजूदा कानून में संशोधन करने और स्थानीय समुदायों, खासकर आदिवासियों और किसानों के उत्थान के लिए कोयला खदानों सहित खदानों से होने वाले मुनाफे में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने, बैंक व बीमा के निजीकरण की कोशिश बंद करने, बीमा में विदेशी निवेश और एलआईसी के शेयर बेचने का विरोध की मांग शामिल है।  

इसके साथ सभी कृषि उपजों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार एमएसपी की गारंटी, खरीद की गारंटी समेत केन्द्र सरकार द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा को दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू करने की भी मांग की गयी है। हड़ताल की मांगों में बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 वापस लेने, बिजली का निजीकरण बंद करने व प्रीपेड स्मार्ट मीटर को रद्द करने की भी मांग है। इसके अलावा सभी के लिए मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता के अधिकार की गारंटी दी जाने, नई शिक्षा नीति-2020 को रद्द करने की मांग भी शामिल है। इसी के साथ संसाधन जुटाने के लिए अति धनवानों पर कर लगाने, कॉरपोरेट कर में वृद्धि करने, सम्पत्ति कर और उत्तराधिकार कर को पुनः लागू करने, संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, विविध संस्कृतियों, भाषाओं, कानून के समक्ष समानता आदि सुनिश्चित करने तथा देश के संघीय ढाँचे पर हमले बंद करने की भी मांग हड़ताल में शामिल है। 
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