इंदौर। करोड़ों की लागत से तैयार महाकाल लोक की मूर्तियां खंडित होने के मामले में हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में शुक्रवार को सुनवाई होना है। सरकार याचिका निरस्त करने की मांग करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बता रही है तो याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने जनहित का मुद्दा उठाया है। उन्हें ऐसा करने से रोकने का कोई प्रविधान नहीं है। याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर बहस होना है। हाई कोर्ट ने शासन की तरफ से प्रस्तुत आवेदन स्वीकार कर लिया तो याचिका में आगे सुनवाई नहीं होगी।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागडिया और विभोर खंडेलवाल के माध्यम से दायर की है। याचिका में उज्जैन के महाकाल लोक के निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा है कि निविदा में शर्त रखी गई थी कि मूर्तियां गुणवत्तापूर्ण होंगी लेकिन मूर्तियों की गुणवत्ता कभी किसी ने जांची ही नहीं। 30 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चली हवा में ही ये मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गईं जबकि कंपनी ने दावा किया था कि 100 किमी प्रतिघंटे की आंधी में भी इन मूर्तियों का कुछ नहीं बिगड़ेगा।
याचिका में कहा है कि महाकाल लोक के प्रति आमजन की आस्था है। मूर्तियों को खंडित देखकर भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। महाकाल लोक में हुए भ्रष्टाचार की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की निगरानी में कराई जाना चाहिए। शासन याचिका को राजनीति के प्रेरित बताकर इसे निरस्त करने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि लोकायुक्त इस मामले में पहले से जांच कर रहा है तो अतिरिक्त जांच की आवश्यकता ही नही है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वे जनहित मुद्दे उठाने को स्वतंत्र हैं। शुक्रवार को इसी मुद्दे को लेकर बहस होगी।











