नीतीश कुमार का बयान क्यों प्रभावी नहीं ?
राज्य के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने जब यह बयान दिया था तब वे महागठबंधन की सरकार में थे। इनकी सरकार को तब उसी राजद का साथ मिला था जिसके शासन को कभी जंगलराज कहा गया था। नीतीश कुमार ने दो बार राजद के समर्थन से सत्ता की कुर्सी थामी थी। पहली बार बिहार में 'महागठबंधन' की सरकार (नवंबर 2015 से जुलाई 2017 तक) और दूसरी बार (अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक) बनी थी। एनकाउंटर वाला बयान अप्रैल 2023 में आया था। यह वह समय था जब उत्तरप्रदेश में अतीक अहमद एवं उसके गैंग के प्रभाव से मुक्त होने का संघर्ष पुलिस प्रशासन के स्तर पर चल रहा था। तब नीतीश कुमार ने सवाल उठाया था कि कोई सरेंडर करना चाहे तो पुलिस उसे गोली कैसे मार सकती है? उनके अनुसार, अपराधियों को सजा देने का अधिकार सिर्फ कोर्ट को है, पुलिस को नहीं। किसी को भी गोली मार देने का कोई नियम नहीं है और यह कानून सम्मत नहीं है। दोषी करार होने पर सजा का फैसला केवल अदालत करती है, पुलिस नहीं।इधर बिहार में बढ़ा था क्राइम, उठने लगे थे सवाल
अपराध नियंत्रण को ले कर बिहार प्रयोगस्थली बन चुका है। अपराध मुक्त समाज बिहार के विकास के लिए कितना जरूरी है, यह 90 के दशक वाले राज्य की वीभत्स तस्वीर से समझा जा सकता है। यह बिहार ही है जिसके बारे में उच्च न्यायालय ने जंगलराज वाली टिप्पणी की थी। अपराध नियंत्रण जरूरी है. यह सुशासन और विकास चुनने वाली जनता की पहली पसंद है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नीतियां भी अपराध नियंत्रण को ले कर सख्त हुई है। सम्राट चौधरी की इस नीति के पहले भी नीति बनी। और वह नीति थी नीतीश कुमार की जिसका मूल मंत्र था अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस।बिहार में पिछले दिनों बिहार में बढ़ते अपराध ने एनडीए की सरकार को कठघरे में करने का काम किया था।











