कारगिल युद्ध में भारत की विजय पर दुनिया को था संशय, हमारे जांबाज सैनिकों ने पलट दी थी बाजी

कारगिल युद्ध में भारत की विजय पर दुनिया को था संशय, हमारे जांबाज सैनिकों ने पलट दी थी बाजी
भोपाल। कारगिल युद्ध में भारत की विजय पर पूरी दुनिया को संशय था, क्योंकि पाकिस्तान ने इसकी तैयारी पहले ही कर ली थी और बेहद विषम भौगोलिक स्थिति में वे बेहतर मोर्चे पर थे। भौगोलिक स्थिति के कारण हमारे सैनिकों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी वीरता और शौर्य के आगे दुश्मन को घुटने टेकने पड़े थे। आखिर हमारे जांबाज सैनिक विजयी होकर ही लौटे।

कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है। विजय दिवस की पूर्व संध्या पर नवदुनिया ने सेवानिवृत एवं अनुभवी सैन्य अधिकारियों से बात की। सैन्य अधिकारियों के अनुसार कारगिल युद्ध में भारत की विजय की बड़ी वजह सैनिकों का जज्बा था। सैनिकों ने भारत माता की रक्षा के लिए वह कर दिखाया, जिसे दुनिया असंभव मान रही थी। पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मघाती हमलों का जवाब हमारी सेना ने पुरजोर ढंग से दिया। सैनिकों ने अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया, लेकिन भारतमाता की आन, बान और शान को कम नहीं होने दिया। इस युद्ध में भारत के 527 सैनिकों को बलिदान देना पड़ा था। कर्नल नारायण पारवानी के अनुसार कारगिल युद्ध दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर लड़ा गया ऐतिहासिक युद्ध था।

शूरवीरों ने असंभव को संभव कर दिखाया

कारगिल की विजय भारतीय सेना के अफसरों और जवानों की वीरता, साहस और बलिदान की अमर कथा है। पाक सेना ने 1999 की शुरुआत में ही छद्म वेश में घुसपैठ शुरू कर दी। भारतीय सेना और गुप्तचर एजेंसियां इसका आकलन सही ढंग से नहीं कर सकीं। इसका लाभ पाकिस्तान की सेना को मिला, इस कारण प्रारंभ में हमारी सेना को बहुत परेशान होना पड़ा। हमारे वीरों को बलिदान देना पड़ा लेकिन पाक की करतूतों का पता चलने के बाद सेना ने अद्भुत साहस और वीरता का परिचय देकर विश्व मंच पर अपनी मजबूती के झंडे गा़ड़ दिए।
- नारायण पारवानी, सेवानिवृत कर्नल

कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की सेना को भौगोलिक स्थिति का लाभ मिला। पाक ने युद्ध की पूरी तैयारी काफी समय पहले ही कर ली थी। इसकी खबर हमें बाद में मिली। भारतीय सेना को पता चला कि पहाड़ियों पर पाक सेना ने बंकर बना लिए हैं। इसका पता लगाने के लिए भारत की एक टुकड़ी ऊपर पहुंची लेकिन पाक ने हमला कर दिया। कई सैनिकों को युद्ध की शुरुआत में ही बलिदान देना पड़ा। बाद में भारतीय सेना ने योजनाबद्ध ढंग से युद्ध लड़ा।
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