असफलता से सफलता प्राप्त करने का सबसे बड़ा उदाहरण चंद्रयान-3 की सफलता - डा. वेद प्रकाश

असफलता से सफलता प्राप्त करने का सबसे बड़ा उदाहरण चंद्रयान-3 की सफलता - डा. वेद प्रकाश

भोपाल। जीवन में सकारात्मक रहने का प्रयास करिये, अपना सर्वोच्च देने का प्रयास करिये। अगर इसमें कहीं कोई कमी हो जाती है तो हताश और निराश मत होए। असफलता से सफलता प्राप्त करने का सबसे बड़ा उदाहरण चंद्रयान-3 की सफलता से देखा जा सकता है। कुछ वर्ष पहले चंद्रयान 2 की असफलता पर जब हमारे वैज्ञानिक प्रधानमंत्री से लिपटकर रो रहे थे, इस मिशन की सफलता की नींव उसी दिन रख दी गई थी। यह कहना है दिल्ली के किरोड़ी मल कालेज में हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा . वेद प्रकाश का। वे शुक्रवार को रवींद्र भवन में 'मन की बात' पर केंद्रित 100 घंटे की नानस्टाप मैराथन सेमिनार नाटआउट @100 में युवाओं से चर्चा कर रहे थे।

टास्क इंटरनेशनल पब्लिक पालिसी रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डा. वेद प्रकाश ने जीवन में मन की बात के महत्व के बारे में बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न स्कूल, कॉलेज के स्टूडेंट्स, एनसीसी और एनएसएस के कैडेट्स उपस्थित हुए। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा ने बताया कि पांच दिवसीय यह कार्यक्रम देश में पहली बार हो रहा है जिसे 100 घंटे, 100 दर्शक, 100 वक्ता थीम पर आयोजित किया है।

एक वैचारिक यात्रा है मन की बात

डा. वेद प्रकाश ने कहा कि मन की बात कहने, सुनने, समझने और अपनाने के लिए मन चाहिए। जब तक आपका मन नहीं होगा तब तक आप एक जिम्मेदार नागरिक नहीं बन पायेंगे। उन्होंने कहा कि मन की बात एक वैचारिक यात्रा है। यह आपकी सोच और विचार को भारतीयता की ओर ले जाने का माध्यम है। कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा कि मन की बात की यह शृंखला भारत की उपलब्धियां, परंपरा, संस्कृति को जानने, पहचानने और सकारात्मक बातों को अपनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

भारत को बदलना है, सुनना जरूरी है

इग्नू के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार नीरज भारद्वाज ने कहा कि भाषा को जानना और भाषा के बारे में जानना दोनों अलग-अलग बात है। भारतीय संस्कृति का पहला पक्ष सुनना, बोलना और पढ़ना है। अच्छा श्रोता वही है जो अच्छा वक्ता होता है। इसलिए मेरा सभी युवाओं से आग्रह है कि वह सुनने की आदत डालें। नीरज ने कहा कि भारत को यदि बदलना है तो तुलसी को सुनना होगा, संस्कृति को समझना होगा। उन्होंने सरदार वल्लभ भाई पटेल की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा देश पांच सौ पचास रियासत में बंटा था, लेकिन इस देश को एक सूत्र में पिरोने का काम सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। इस देश का जो एकीकरण हुआ है वह हमारे देश के लिए जरूरी था।
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