भोपाल । दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व मंगलवार, 19 सितंबर से शुरू हो गए हैं। 10 दिवसीय इस पर्व के दौरान उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, अकिंचन और ब्रह्मचर्य धर्म की साधना की जा रही रही। जैन मंदिरों में रोज विशेष धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं। इसी सिलसिले में पुराने शहर के चौक बाजार में स्थित जैन मंदिर में मुनि संबुद्ध सागर महाराज ने शुक्रवार को पर्युषण पर्व के चौथे दिन श्रद्धालुओं को उत्तम शौच धर्म की महत्ता के बारे में बतलाया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को अपने लोभ को सीमित करना चाहिए। अपने मन से राग, द्वेष, लोभ आदि का क्षय करना चाहिए। लोभ का नाश होने पर ही उत्तम शौच धर्म प्रकट होता है।
संसार के कार्यों में इतने मगन न हों कि आत्मा का विकास रुक जाए
मुनिश्री ने कहा कि कर्म काटने की विधि मात्र जिनेन्द्र भगवान के दरबार में ही मिलती है। हम सभी सौभाग्यशाली है कि हमें जिनेन्द्र भगवान का शासन मिला है। हम संसार के कार्यों में इतने मगन न हो जाएं कि कहीं हमारा आत्मा का विकास रुक जाए। संसार में जब लोगों को मोक्ष पाने का भाव या इच्छा खत्म हो जाएगी, तब इस दुनिया में प्रलय आएगा, लेकिन फिर भी यह जैन धर्म जीवित रहेगा।
मंदिरों में जारी हैं धार्मिक अनुष्ठान
श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के मंत्री मनोज आरएम ने बताया की पर्युषण पर्व के चौथे दिन नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में धर्मावलंबियों ने उत्तम शौच धर्म की आराधना भक्ति भाव से की गई। ट्रस्ट के एमपी नगर जैन मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा, पूजन आदि के बाद उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन हुए। जैन मंदिर पर निशुल्क भोजन शाला पंचायत कमेटी द्वारा संचालित हो रही है, जिसमे प्रतिदिन 400 से 500 लोग शुद्ध भोजन ग्रहण कर रहे हैं।
बच्चों ने नाटक के जरिए बताया जंक फूड सेवन का नुकसान
पंचायत कमेटी के अध्यक्ष मनोज बांगा ने कहा कि रात्रि में चौक धर्मशाला में पाठशाला के बच्चों द्वारा फास्ट फूड, जंक फ़ूड के नुकसान एवं उससे बचने के तरीके पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। सभी बच्चों को कमेटी द्वारा पुरस्कृत किया गया।











