रेप पीड़िता ने आरोपी को पहचानने से कर दिया था इनकार, DNA रिपोर्ट से दो दोषियों को हुई उम्रकैद की सजा

रेप पीड़िता ने आरोपी को पहचानने से कर दिया था इनकार, DNA रिपोर्ट से दो दोषियों को हुई उम्रकैद की सजा
ग्वालियर: एक बुजुर्ग महिला के साथ हुई घिनौनी वारदात में कोर्ट ने आखिरकार अपना फैसला सुना दिया है। चार साल पहले 60 वर्षीय महिला के साथ गैंगरेप करने वाले दो मुजरिमों, एक हलवाई और उसके साथी, को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों ने महिला के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी जान लेने की भी कोशिश की थी। डीएनए रिपोर्ट ने दोनों अपराधियों के जुर्म को साबित कर दिया, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह सजा सुनाई।

अपराधियों के साथ नरमी नहीं


न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि बलात्कार सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि आत्मा पर भी गहरा घाव करता है, जो कभी नहीं भरता। इसलिए ऐसे अपराधियों पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। यह घटना 23 मार्च 2021 की है। पीड़िता, जो पूड़ी बेलने का काम करती थी, को हलवाई का साथी राजू उर्फ़ भरत बहला-फुसलाकर ले गया। रास्ते में हलवाई कालू उर्फ़ दिलीप पाल भी उनके साथ हो लिया। तीनों ई-रिक्शा में बैठकर शीतला माता मंदिर के पास सुनसान इलाके में पहुंचे। वहां उन्होंने महिला के हाथ-पैर बांध दिए और उसके साथ बलात्कार किया।


चाकू से कर दिया हमला


उसके बाद, जान से मारने की नीयत से उस पर चाकू से हमला भी किया। महिला को बेहोश देखकर, वे उसे मरा समझकर भाग गए। अगले दिन, कुछ लोगों ने महिला को निर्वस्त्र अवस्था में पड़ा देखा और उसे अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।


बच निकला था हलवाई


पीड़िता ने एक आरोपी हलवाई दिलीप पाल को पहचानने से इनकार कर दिया था, जिससे वह शुरुआत में बच निकला। लेकिन, पुलिस ने महिला के शरीर पर मिले सबूतों का डीएनए टेस्ट करवाया, जिससे दोनों आरोपियों के शामिल होने की पुष्टि हो गई। डीएनए रिपोर्ट अहम सबूत साबित हुई और अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।


आत्मा पर है गहरा घाव


अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बलात्कार केवल एक शारीरिक आघात नहीं, बल्कि आत्मा पर एक गहरा घाव है, जो कभी भरा नहीं जा सकता है। न्यायाधीश ने आगे कहा कि ये एक ऐसा अपराध है जो आत्मसम्मान को क्षति पहुंचाता है। सामाजिक प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है। ऐसे अपराधी के प्रति नरमी नहीं दिखाई जा सकती है। कठोर सजा देना भी कठोर कानून की आत्मा के अनुरूप ही है।
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