बिगड़े हालात में भी मणिपुर में जमे हैं आरएसएस कार्यकर्ता: भागवत
उन्होंने कहा, 'मणिपुर की स्थिति बहुत कठिन है। वहां सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जो लोग वहां व्यापार या समाज सेवा के लिए गए हैं, उनके लिए तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है।' आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा, 'लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी संघ के स्वयंसेवक वहां मजबूती से डटे हुए हैं और माहौल शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।'
भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक हिंसा के बीच भी राज्य से नहीं भागे और वे जीवन को सामान्य बनाने और दोनों समूहों के बीच गुस्से को कम करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, 'एनजीओ सब कुछ नहीं संभाल सकते, लेकिन संघ जो कर सकता है वह करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। वे संघर्ष में शामिल सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं। नतीजतन, उन्होंने लोगों का विश्वास हासिल किया है।'
गुमला में दिए भागवत के बयान की खूब हुई थी चर्चा
भागवत के इस बयान के संदर्भ ढूंढे जाने लगे। एक वर्ग ने कहा कि भागवत ने ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नसीहत के तौर पर कही हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तो भागवत के बयान को पीएम मोदी पर दागी गई मिसाइल तक बता दिया। उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, 'मुझे यकीन है कि स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को इस ताजा अग्नि मिसाइल की खबर मिल गई होगी जिसे नागपुर ने झारखंड से लोक कल्याण मार्ग को निशाना बनाकर दागा है।' मोहन भागवत ने इस बार पुणे में 'इंसान-भगवान' वाली बात छेड़ दी।











