चिकिता के पिता एक किसान हैं, जिनके पास 3 एकड़ जमीन है। वह वॉलीबॉल खेलते थे, लेकिन पैसों की कमी के चलते कभी भी अपने जिले से बाहर नहीं खेले। हालांकि, वह बेटी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे। पहले उन्होंने कराटे के बारे में सोचा, लेकिन वहां राजनीति ज्यादा है। इसके बाद बैडमिंटन के बारे में सोचा, लेकिन हैदराबाद उनके घर से बेहद दूर था और वहां रुकने पर खर्चा ज्यादा था, जो वह नहीं उठा सकते थे। अंत में उन्होंने अपने घर से 20 किमी दूर आर्चरी एकेडमी में 13 साल की बेटी को एडमिशन दिलाया।
गरीब पिता ने खेत गिरवी रखकर खरीदा धनुष, कर रहे थे खेतों में काम तभी बेटी ने जीता दूसरा गोल्ड, घर पर न TV, न फोन
नई दिल्ली: एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 2 गोल्ड मेडल जीतने वाली चिकिता तनिपार्ती पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। चिकिता और अन्य तीरंदाजों की वजह से भारत एशियन गेम्स मेडल टैली में टॉप 10 में जगह बना पाया है। हालांकि, चिकिता की सफलता जितनी सुनहरी है, उनका संघर्ष भी उतना ही मुश्किल था और इस दौरान उनके पिता ने बेटी पर पूरा भरोसा जताया। चिकिता एक गरीब किसान परिवार से आती हैं। उनके पास धनुष खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में पिता ने खेत गिरवी रख बेटी को जरूरी सुविधाएं दीं और अब बेटी ने 2 मेडल जीतकर पूरे देश को जश्न मनाने का मौका दिया है।
चिकिता के पिता एक किसान हैं, जिनके पास 3 एकड़ जमीन है। वह वॉलीबॉल खेलते थे, लेकिन पैसों की कमी के चलते कभी भी अपने जिले से बाहर नहीं खेले। हालांकि, वह बेटी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे। पहले उन्होंने कराटे के बारे में सोचा, लेकिन वहां राजनीति ज्यादा है। इसके बाद बैडमिंटन के बारे में सोचा, लेकिन हैदराबाद उनके घर से बेहद दूर था और वहां रुकने पर खर्चा ज्यादा था, जो वह नहीं उठा सकते थे। अंत में उन्होंने अपने घर से 20 किमी दूर आर्चरी एकेडमी में 13 साल की बेटी को एडमिशन दिलाया।
चिकिता के पिता एक किसान हैं, जिनके पास 3 एकड़ जमीन है। वह वॉलीबॉल खेलते थे, लेकिन पैसों की कमी के चलते कभी भी अपने जिले से बाहर नहीं खेले। हालांकि, वह बेटी को खिलाड़ी बनाना चाहते थे। पहले उन्होंने कराटे के बारे में सोचा, लेकिन वहां राजनीति ज्यादा है। इसके बाद बैडमिंटन के बारे में सोचा, लेकिन हैदराबाद उनके घर से बेहद दूर था और वहां रुकने पर खर्चा ज्यादा था, जो वह नहीं उठा सकते थे। अंत में उन्होंने अपने घर से 20 किमी दूर आर्चरी एकेडमी में 13 साल की बेटी को एडमिशन दिलाया।
